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सौर ऊर्जा से रोशन होगी सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की नई इमारत केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की ओर से बनाई गई अब तक की सबसे बड़ी इमारत है। सौर ऊर्जा से लैस विश्वस्तरीय खूबियों वाला SC का यह नया परिसर वहीं है, जहां अप्पू घर होता था। 883 करोड़ रुपये की लागत से इसे 7 वर्षों में तैयार किया गया है। यहां कोर्ट का प्रशासनिक कामकाज, रिकार्ड और रजिस्ट्री आदि होगी, लेकिन अदालतें पुराने भवन में ही रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट को जानें
सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत 28 जनवरी 1950 को हुई थी। प्रारंभ में इसका कामकाज संसद भवन के कुछ हिस्से में होता था। 1958 में भगवान दास रोड पर सुप्रीम कोर्ट के भवन का निर्माण हुआ। नई इमारत इसका विस्तार है। इसका निर्माण 2012 में शुरू हुआ और वर्ष 2019 में पूरा हुआ। इसमें तीन स्तरीय कार पार्किंग है, जहां 1800 कारें खड़ी हो सकती हैं।
यह थी खास चुनौती
भवन निर्माण का काम देख रहे एक अधिकारी बताते हैं कि इसके निर्माण में सबसे बड़ी चुनौती जमीन के पानी के दबाव को रोकने की थी। यमुना के पास होने के कारण यहां दो-ढाई मीटर नीचे ही पानी मिल जाता है, जबकि तीन मंजिला पार्किंग 16 मीटर नीचे बनाई गई है। पानी का दबाव रोकने के लिए स्पेशल स्वायल एंकर लगाए हैं। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है। एक-एक लाख लीटर वाले तीन टैंक बनाए गए हैं, जिसमें बारिश के पानी का दोबारा इस्तेमाल होगा।
और भी हैं इंतज़ाम
भवन में तीन गेट हैं। इसे भी पुरानी इमारत से मेल खाते लाल पत्थर से फिनिश किया गया है। यहां आग लगने की स्थिति में भी साफ हवा आने का इंतजाम है। यहां 40 फीसद बिजली सौर ऊर्जा से मिलेगी व शून्य फीसद सीवर म्यूनिसिपल डिस्चार्ज होगा। इमारत के अंदर ही STP लगा हुआ है।

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