Madhya Pradesh Tourism

Home » » डीएनए के से होगा कैंसर का होगा इलाज, नहीं मरेंगे नॉर्मल सेल

डीएनए के से होगा कैंसर का होगा इलाज, नहीं मरेंगे नॉर्मल सेल

कैंसर की बढ़ती समस्या ने मेडिकल साइंस के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। सबसे बड़ी चिंता इसके इलाज के दौरान शरीर पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव भी है।लेकिन, वैज्ञानिक इसका समाधान ढूढ़ने में जुटे हुए हैं। डीएनए के जरिये कैंसर के इलाज पर शोध चल रहा है। इस पर शोध कर रहीं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के रसायन विभाग की प्रोफेसर डॉ. रंजना अग्रवाल प्रारंभिक नतीजों से उत्साहित हैं।
डॉ. रंजना वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं विकास अध्ययन संस्थान सीएसआइआर-एनआइएसटीएडीएस) की नवनियुक्त महिला निदेशक भी हैं। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने बताया कि कैंसर के इलाज के दौरान शरीर पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव इस बीमारी से भी ज्यादा हानिकारक होता है। मसलन, कीमोथेरेपी के बाद बाल झड़ जाना, हृदय और किडनी पर असर पड़ना और शरीर के नॉर्मल सेल का इलाज के दौरान मर जाना है। वह ऐसी तकनीक ईजाद कर रही हैं, जिससे सिर्फ कैंसर के सेल्स ही खत्म हों। उनके साथ लगते दूसरे स्वस्थ सेल्स को नुकसान न हो। ऐसा नहीं है कि इसमें मानव शरीर का ही डीएनए इस्तेमाल हो।
व्हेल और गाय के बछड़े के डीएनए कंपाउंड बनाकर भी इलाज हो सकता है। डीएनए से निर्मित यौगिकों को कैंसर सेल्स के पास शरीर में प्रवेश कराया जाएगा और जब उन पर पराबैंगनी विकिरण डाली जाएंगी तो सिर्फ कैंसर के ही सेल खत्म होंगे। डॉ. रंजना ने बताया कि देश भर में कैंसर के जितने केस आ रहे हैं, उसका 30 प्रतिशत सिर्फ हरियाणा में हैं। यह और बढ़ेगा। इतने बड़े स्तर पर कैंसर का बढ़ना चिता का विषय है। इसलिए जरूरी है कि इलाज की ऐसी विधि खोजी जिसमें शरीर के साथ-साथ प्रकृति का भी नुकसान न हो। ग्रीन सिथेसिस तकनीक पर वह डीएनए के जरिये कैंसर का इलाज तलाश रही हैं। सस्ता इलाज हो, इसके लिए अक्षय ऊर्जा से यह प्रयोग करने की कवायद है।
उन्होंने बताया कि भूमिगत जल, तेजी से बढ़ता औद्योगिकरण, खाद्य प्रदूषण, पेस्टीसाइड और पराली जलाने के कारण हमारे यहां कैंसर की समस्या ज्यादा बढ़ी है। डॉ. रंजना को हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने डीएनए के माध्यम से कैंसर के इलाज की तकनीक विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये का शोध अनुदान दिया है। इस शोध को कॉमनवेल्थ फेलोशिप (2003-2004), इंडियन केमिकल सोसाइटी द्वारा डॉ. बासुदेव बनर्जी मेमोरियल अवार्ड (2014) और भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा प्रो. एसएस कटियार एंडॉमेंट अवार्ड (2015) के रूप में मान्यता मिल चुकी है।

उन्होंने बताया कि भूमिगत जल, तेजी से बढ़ता औद्योगिकरण, खाद्य प्रदूषण, पेस्टीसाइड और पराली जलाने के कारण हमारे यहां कैंसर की समस्या ज्यादा बढ़ी है। डॉ. रंजना को हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने डीएनए के माध्यम से कैंसर के इलाज की तकनीक विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये का शोध अनुदान दिया है। इस शोध को कॉमनवेल्थ फेलोशिप (2003-2004), इंडियन केमिकल सोसाइटी द्वारा डॉ. बासुदेव बनर्जी मेमोरियल अवार्ड (2014) और भारतीय विज्ञान कांग्रेस द्वारा प्रो. एसएस कटियार एंडॉमेंट अवार्ड (2015) के रूप में मान्यता मिल चुकी है।

Share This News :
 
Site Link : Contact Us | sitemap
Copyright © 2013. khabrokakhulasa.com | Latest News in Hindi,Hindi News,News in Hindi - All Rights Reserved
Template Modify by Unreachable
Proudly powered by Blogger