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जारी रहेगी भीषण गर्मी, इन राज्यों में चलेगी धूल भरी आंधी

नई दिल्ली। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 3-4 दिनों में राजस्थान, मध्यप्रदेश और विदर्भ में भीषण गर्मी का दौर जारी रहेगा। इससे पहले बुधवार को मध्यप्रदेश के नौगांव में 47.9 डिग्री तर्ज किया गया था। मौसम विभाग ने हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी यूपी में धूल भरी आंधी चलने की आशंका जताई है। इन हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किमी प्रति घंटा रहेगी।
इससे पहले स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों ने बताया था कि मौसमी स्थितियां मानसून के आगमन के लिए अनुकूल बन रही हैं। मानसून जल्द ही भारत के दक्षिणी भागों तक पहुंचने वाला है। यह सिस्टम ऐसे समय में बन रहा है जब समुद्र की सतह का तापमान 30 डिग्री है। इसके अलावा यह सिस्टम लंबे समय तक समुद्री क्षेत्र में रहेगा, जिसके कारण इसे पर्याप्त मात्रा में नमी मिलती रहेगी। यह मौसमी सिस्टम एक चक्रवाती तूफान भी बन सकता है।
मध्यप्रदेश में 24 साल बाद इतनी भीषण गर्मी
मध्यप्रदेश में भीषण गर्मी का दौर जारी है। बुधवार को प्रदेश में नौगांव में पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा।प्रदेश के पांच स्थानों पर तीव्र लू चली, जबकि 13 स्थान लू की चपेट में रहे। राजधानी भोपाल में तापमान 45.4 डिग्रीसे. दर्ज किया गया,जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक भीषण गर्मी से अभी राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ.डीपी दुबे ने बताया कि इसके पूर्व वर्ष-1995 में भीषण गर्मी पड़ी थी। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक नौगांव के बाद खजुराहो, रायसेन, दमोह में अधिकतम तापमान 47 डिग्रीसे. रिकार्ड हुआ। वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एसके डे ने बताया कि वातावरण में नमी नहीं है, इससे शुष्क हवाएं तापमान में इजाफा कर रही हैं। फिलहाल कोई वेदर सिस्टम सक्रिय नहीं रहने से अभी एक-दो दिन तक गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
मानसून की धीमी रफ्तार से किसान परेशान
मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों के माथे पर बल डालना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने कहा है कि इस बार मानसून देरी से आएगा और इसे देखते हुए इस साल खरीफ सीजन की बुवाई में विलंब होना तय माना जा रहा है। मौसम एजेंसी स्काईमेट ने मानसून की देरी को दखते हुए किसानों के लिए सलाह जारी की है। स्कामेट के मुताबिक बुवाई में देरी के चलते उन्हें अपनी खेती के पैटर्न में थोड़ा बदलाव करना चाहिए। मानसून की बारिश देर से होने की दशा में सोयाबीन की फसल प्रभावित हो सकती है।

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