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5G सर्विस लाने की तैयारी में मोदी सरकार, ट्रायल में इन कंपनियों को किया जा सकता है शामिल

अगर सबकुछ ठीक रहा तो मोदी सरकार अगले दो महीने में 5जी स्पेक्ट्रम का परीक्षण शुरू कर सकती है। इसके लिए दूरसंचार आयोग, डिजीटल कम्युनिकेशन कमीशन ने मंजूरी दे दी है। बता दें कि, मोदी सरकार जल्द ही 5जी के ट्रायल शुरू करने का प्लान बना रही है। सरकार इसमें रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, एरिक्शन, नोकिया और सैमसंग जैसी कंपनियों को शामिल कर सकती है। कई स्टार्ट-अप और शैक्षणिक संस्थाओं को भी ट्रायल में शामिल किया जा सकता है।
केंद्रीय संचार राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने बताया कि, 'हम वैश्विक प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए तालमेल बनाए रखना चाहते हैं। भारत 5जी को लांच करने में पीछे नहीं रहना चाहता है। यही कारण है कि हमने यह समिति बनाई है।' टेलीकॉम विभाग एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, रिजर्व प्राइस पर ही स्पेक्ट्रम की बिक्री हो तो सरकार को कम से कम 5.8 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। हालांकि, सरकार नीलामी से ज्यादा से ज्यादा रकम हासिल करना चाहती है।
5जी सेवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप का रास्ता अपनाया सकती है। इसके तहत 3 लाख कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीण क्षेत्रों में खोले जाएंगे, इसके तहत एक लाख ग्राम पंचायतों को दो वाइफाइ हॉटस्पॉट भी दिए जाएंगे। एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पेक्ट्रम की नीलामी के बाद देश में किफायती 5G सेवाएं शुरू हो जाएगी। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में फाइबर टु द होम (FTTH) इंटरनेट सेवा भी शामिल है।
खबरों के अनुसार दूरसंचार मामलों में निर्णय करने सर्वोच्च निर्णायक संस्था डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन (DCC) द्वारा इस योजना को मंजूर कर लिया गया है। इसके तहत करीब 8,600 मेगा हर्ट्ज मोबाइल एयरवेव्स की नीलामी होगी। रिपोर्ट के अनुसार यह नीलामी इस साल के अंत तक हो सकती है। बता दें कि, 5जी का मतलब पांचवीं पीढ़ी की मोबाइल नेटवर्क टेक्नोलॉजी से है। इसकी स्पीड 4जी से करीब 100 गुना तक अधिक होगी। इससे इंटरनेट की स्पीड काफी बढ़ जाएगी और तेजी से ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध होंगी। 5जी के आने से हेल्थ, एजुकेशन सहित स्मार्ट ड्राइविंग, स्मार्ट सिटी, स्मार्ट होम, रिमोट सर्जरी जैसी सेवाएं सुलभ हो जाएंगी।
गौरतलब है कि इससे पहले मोदी सरकार स्पेक्ट्रम नीलामी सफल नहीं रही थी और केवल 40 फीसदी स्पेक्ट्रम की नीलामी हो पाई थी। इससे सबक लेते हुए सरकार ने टेलीकॉम रेगुलेटर ट्राई से इस बारे में सुझाव मांगे थे कि नए दौर की नीलामी किस तरह से की जाए। उधर, डीसीसी सदस्यों को लगता है कि स्पेक्ट्रम काफी कीमती चीज है। इसका फायदा तब ततक नहीं लिया जा सकता, जबकि तक की इसकी बिक्री नहीं हो जाती।

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