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अमेरिका ने भारत को कारोबारी वरीयता का दर्जा किया खत्म, 5 जून से फैसला होगा प्रभावी

नई दिल्ली । अंतत: अमेरिका से भारत को मिला कारोबारी वरीयता का दर्जा वापस लेने का ऐलान हो गया। अमेरिका ने कहा है कि 5 जून से भारत के करीब 2000 उत्पादों को अमेरिका में शुल्क मुक्त आयात की सुविधा समाप्त हो जाएगी। अमेरिका का कहना है कि भारत ने अपने बाजार में अमेरिकी उत्पादों को बराबर और उपयुक्त पहुंच उपलब्ध कराने का भरोसा नहीं दिया है। अमेरिका के इस कदम पर भारत ने सधे शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस फैसले के बावजूद अमेरिका से मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की दिशा में काम करता रहेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गत 4 मार्च को भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफ्रेसेंज (जीएसपी) के दायरे से बाहर करने का ऐलान किया था। इसके लिए भारत को 60 दिन का समय दिया गया था। यह अवधि 3 मई को समाप्त हो गई थी। जीएसपी के तहत भारत जिन उत्पादों को अमेरिका भेजता है उन पर वहां आयात शुल्क नहीं लगता। भारत ने अपने बयान में कहा है 'यह सुविधा विकसित देशों की तरफ से भारत समेत कई विकासशील देशों को दी जा रही थी। यह सुविधा देना उनका अपना फैसला था, उसके बदले में हमें कुछ देने की बाध्यता नहीं थी।'

अमेरिका का यह फैसला उसके मेडिकल उपकरण और डेयरी उद्योग की शिकायत के बाद आया है। इन दोनों उद्योगों की शिकायत रही है कि भारत उनके उत्पादों के लिए अपने बाजार में बराबर की पहुंच उपलब्ध नहीं करवा रहा है। अमेरिकी मेडिकल उपकरण उद्योग ने भारत सरकार की तरफ से स्टेंट जैसे जीवन रक्षक उत्पादों की कीमतों पर अधिकतम सीमा तय करने के फैसले का भी विरोध किया था।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने बीते दो महीने में अमेरिका के साथ हुई कई वार्ताओं में इस बात का भरोसा जताया था कि बातचीत के जरिए इन मुद्दों का रास्ता निकालने की कोशिश की जा सकती है। इसका समाधान भी दिया गया। लेकिन अमेरिका ने स्वीकार नहीं किया। अमेरिका और अन्य राष्ट्रों की तरह भारत भी इस मसले पर अपने राष्ट्रीय हितों को तरजीह देता है। भारत पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि इन उत्पादों पर रियायतों को बातचीत का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।
अमेरिका ने जीएसपी की शुरुआत 1976 में की थी। इसके तहत भारत से अमेरिका को निर्यात किये जाने वाले उत्पादों में केमिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्र के उत्पाद हैं। इन उत्पादों को अमेरिका में शुल्क मुक्त प्रवेश मिलता है।
नहीं होगा बहुत अधिक असर
निर्यात संगठनों के फेडरेशन फियो के प्रेसिडेंट गणेश कुमार गुप्ता का मानना है कि अमेरिका के इस फैसले का असर काफी सीमित होगा। गुप्ता ने कहा कि साल 2018 में अमेरिका को 51.4 अरब डालर का निर्यात भारत से किया गया। जीएसपी के तहत इसमें केवल 6.35 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है। इस निर्यात पर अगर अमेरिका में जीएसपी की सुविधा के तहत शुल्क के लाभ के तौर पर देखा जाए तो यह मात्र 26 करोड़ डॉलर बैठता है। इस तरह अमेरिका को होने वाले कुल निर्यात में यह काफी छोटा हिस्सा है। 'अलबत्ता जिन उत्पादों को यह सहूलियत मिलती है उनके लिए इसकी भरपायी करना मुश्किल होगा।'
किन उत्पादों पर कितना असर
  • निर्यात उत्पाद औसत जीएसपी लाभ
  • इमीटेशन ज्वैलरी 6.9 फीसद
  • लेदर उत्पाद
  • (फुटवियर छोड़कर) 6.1 फीसद
  • फार्मा व सर्जिकल 5.9 फीसद
  • केमिकल व प्लास्टिक 4.8 फीसद
  • कृषि (बेसिक व प्रोसेस्ड) 4.8 फीसद
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