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यहां पार्टी नहीं, सिंधिया परिवार का चलता है सिक्का

 गुना। गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर सिंधिया परिवार या समर्थकों का कब्जा रहा है। फिर चाहे भाजपा हो या कांग्रेस, जीत सिंधिया परिवार ने ही दर्ज कराई है। लेकिन 2019 का चुनाव कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। क्योंकि, इस चुनाव में कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया मैदान में है, तो भाजपा ने कांग्रेस छोड़कर आए डॉ. केपी यादव को उम्मीदवार बनाया है।
यूं तो गुना-शिवपुरी संसदीय सीट पर भाजपा पिछले पांच साल से नजरें जमाए हुए थी। इसके लिए बूथ लेवल तक मेहनत की गई, तो चुनाव में दमदार उम्मीदवार मैदान में उतारने का दावा भी पार्टी करती रही थी। यही वजह थी कि कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सामने आने के बाद भी भाजपा ने प्रत्याशी घोषित करने में लंबा इंतजार कराया, जिससे माना जा रहा था कि कोई दमदार उम्मीदवार ही उतारा जाएगा।
लेकिन पार्टी ने जैसे ही डॉ. केपी यादव का नाम घोषित किया, तो राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर चल पड़ा। हरेक के मन में विस्मृत करता सवाल कौंधने लगा कि यह है पार्टी का दमदार प्रत्याशी! क्योंकि, राजनीति के जानकार बताते हैं कि यही डॉ. यादव कांग्रेस में रहते हुए सिंधिया के कट्टर समर्थक और हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं।
इससे टिकट के दावेदारों की कतार में लगे और वर्षों से पार्टी का झंडा-बैनर उठाते रहे नेता असंतुष्ट दिखाई दिए जो उनकी बातों से भी साफ जाहिर होता है। लेकिन पार्टी को भरोसा है कि पार्टी के वोट के अलावा जातिगत वोट भाजपा को मजबूती दे रहा है। खैर, कुछ भी हो, लेकिन चुनाव किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं है।
चुनाव में असंतुष्टों पर रहेगी नजर
इस चुनाव में देखने वाली बात होगी कि दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों के असंतुष्टों की भूमिका क्या रहती है, जिससे भाजपा और कांग्रेस को जूझना है। क्योंकि, कांग्रेस उम्मीदवार को लेकर भले ही कार्यकर्ता एकजुटता की बात करते हों, लेकिन भाजपा में दावेदारों की दौड़ में शामिल नेता इस टिकट से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन दबी जुबां से मन की पीड़ा उजागर हो ही जाती है। इधर, कांग्रेस को भी असंतुष्टों के चलते भितरघात जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वहीं राजनीतिक प्रतिद्वंदियों की चालों से जूझना पड़ सकता है।
असल मुद्दे चुनाव से गायब
इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे गायब रहे। पूरा चुनाव राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित होता दिख रहा है। आरोप-प्रत्यारोप और दल-बदल का सिलसिला भी चल पड़ा । लेकिन लोगों की मूलभूत जरूरतों पर बात कम ही हुई। । गुना में रिंग रोड और स्थाई बस स्टैंड की जरूरत है, तो बमोरी में पानी और रोजगार का संकट बरकरार है। इसी तरह अशोकनगर में उच्च व तकनीकी शिक्षा, उद्योग-धंधे और रोजगार का अभाव बना हुआ है। शिवपुरी में भी वर्षों बाद जलावर्धन योजना के माध्यम से मणिखेड़ा डैम से पानी नहीं मिल सका है। कुछ ऐसे ही सीधे जनता से जुड़े मुद्दे नेताओं की जुबां पर नहीं आ सके।
तीन जिलों की आठ विधानसभा सीटें
गुना-शिवपुरी संसदीय सीट तीन जिलों की आठ विधानसभा सीटों को मिलाकर बनी है। गुना जिले की बमोरी व गुना, अशोकनगर जिले की चंदेरी, मुंगावली व अशोकनगर और शिवपुरी जिले की पोहरी, कोलारस व शिवपुरी विधानसभा शामिल हैं।
पिछले परिणाम पर नजर
जीत का अंतर: 120792
ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांग्रेस: 517036
जयभानसिंह पवैया, भाजपा: 396244
ऐसी है मतदाताओं की स्थिति
कुल मतदाता: 1670528
पुरुष मतदाता: 886298
महिला मतदाता: 784189
अन्य: 41
यह मुद्दे चुनाव में रहेंगे बरकरार
- गुना में रिंग रोड का निर्माण।
- स्थाई बस स्टैंड भी गुना शहर को चाहिए।
- शिवपुरी में जलावर्धन योजना से मणिखेड़ा डैम से पानी लाना।
- अशोकनगर में उच्च व तकनीकी शिक्षा के साथ उद्योग लगाए जाएं।
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