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जेल से ही अब लगातार चहक रहे हैं राजद सुप्रीमो लालू, सत्ता पक्ष की बढ़ा रहे टेंशन

पटना । करीब तीन दशकों तक बिहार की सत्ता को अपने हिसाब से चलाने वाले राजद प्रमुख लालू प्रसाद की लाचारी को चुनावी आईने में देखा जा सकता है। किंतु लालू अपनी मजबूरियों से फायदा उठाने के पुराने खिलाड़ी माने जाते हैं। चारा घोटाले में जेल जाने के बाद के हालात को भी लालू अपने पक्ष में भुना रहे हैं।
लालू जेल में रहकर भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। रोज ट्वीट के जरिए समर्थकों से बात और विरोधियों पर वार कर रहे हैं। आखिरी दौर में ज्यादा ही सक्रिय हो गए हैं, जिससे राजग के रणनीतिकारों की परेशानियों में इजाफा से इन्कार नहीं किया जा सकता। 
महागठबंधन की राजनीति अभी सोशल मीडिया के सहारे चल रही है। जेल अस्पताल से लालू ही नहीं, बल्कि बाहर रहते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और विधायक तेज प्रताप भी अपनी बात आम आदमी तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का जमकर सहारा ले रहे हैं। जरूरत पडऩे पर खत भी लिख रहे हैं। 
जदयू का दावा गैरकानूनी है लालू का यह आचरण 
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने जेल से सियासी खत लिखने को गैरकानूनी बताया है। नीरज के मुताबिक बिहार जेल मैन्यूअल की धारा 999 के मुताबिक कोई भी कैदी जेल से सिर्फ पारिवारिक पत्राचार ही कर सकता है। सियासी खत नहीं लिख सकता। नीरज ने निर्वाचन आयोग से भी लालू की शिकायत की है।
इसके पहले उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी निर्वाचन आयोग से जेल में रहते हुए लालू के ट्वीट करने की शिकायत की थी। मोदी ने लालू पर सोशल मीडिया के जरिए चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया था।
आयोग से पूछा था कि क्या किसी सजायाफ्ता कैदी को स्मार्टफोन, लैपटॉप और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाएं दी जानी चाहिए। लालू से सप्ताह में सिर्फ एक दिन मुलाकात की अनुमति है तो प्रतिदिन उनके विचारों को ट्विटर हैंडल चलाने वाले व्यक्ति तक कौन पहुंचा रहा है। 
किसी और से ट्वीट करा सकता है जेल का कैदी 
निर्वाचन आयोग ने इसे कार्रवाई लायक मानने से इन्कार कर दिया था। अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजय कुमार के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अपने विश्वस्त के जरिए अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करा सकता है। जेल से भी संदेश बाहर भेजवा सकता है, बशर्ते कि आपत्तिजनक बातें नहीं हो। आचार संहिता के उल्लंघन के मामले पर जांच की जा सकती है। 
अधिसंख्य बड़े नेता दूसरे के भरोसे चहकते हैं 
कई बड़े नेताओं के ट्विटर हैंडल एवं फेसबुक संचालित करने की जिम्मेवारी प्रोफेशनल टीम संभालती है। जेल में रहने के कारण लालू सोशल मीडिया का ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। मोबाइल पर सक्रिय करोड़ों वोटरों तक लालू का संदेश आसानी से पहुंच जा रहा है। 
कुछ दिन पहले लालू के जेल से फोन करने का मामला भी उठा था। जदयू ने आयोग से संज्ञान लेने का आग्र्रह किया था। किंतु नियमों का हवाला देते हुए कोई कार्रवाई नहीं हो सकी, क्योंकि ट्विटर पॉलिसी के मुताबिक कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी को अपना एकाउंट संचालित करने की इजाजत दे सकता है। इसी का फायदा उठाते हुए वरिष्ठ नेता अपने करीबियों के जरिए ट्विटर पर लगातार चहकते रहते हैं।
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