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विधानसभा चुनाव में 87 हजार वोट काटने वाले बागियों की कांग्रेस में वापसी

विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़े नेताओं की 'आधी' घर वापसी हो गई है। यानी पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार का जिम्मा तो दिया है मगर अधिकृत वापसी संबंधित कोई निर्देश जारी नहीं हुए। ये वही प्रत्याशी हैं जिन्होंने विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर कांग्रेस के 87 हजार से ज्यादा वोट काटे थे। अब इन्हें ही प्रचार का जिम्मा सौंपे जाने के बाद पार्टी का एक धड़ा नाराज बताया जा रहा है। इससे पार्टी में अंदरुनी कलह भी पनप रहा है।
बता दें कि बीते वर्ष विधानसभा चुनाव में उज्जैन उत्तर से माया त्रिवेदी, दक्षिण सीट से जयसिंह दरबार और महिदपुर से दिनेश जैन ने कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर बगावत की थी। तीनों ने ही निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। उत्तर सीट से माया ने 13 हजार, दक्षिण से दरबार ने 19 हजार और महिदपुर से जैन ने 55 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। महिदपुर में कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि पार्टी के ही कुछ नेता यह भी कहते हैं कि अगर इन तीनों सीटों पर टिकट बंटवारा सही होता तो प्रदेश में कांग्रेस संख्या बल में और मजबूत हो जाती।
चुनाव के बाद से ही वापसी की अटकलें
विधानसभा चुनाव के बाद से ही इन नेताओं की पार्टी में वापसी की अटकलें लगाई जा रही थीं। मगर कुछ नेताओं के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो पाया। मार्च में सीएम कमलनाथ ने तीनों से भोपाल में बात की और कहा था कि सबकुछ भूलकर चुनाव में पार्टी को जिताने का काम करें। इस बीच कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशी एक बागी नेता के घर पहुंचे तो उन्हें यह कहकर लौटाया गया कि अभी अधिकृत वापसी नहीं हुई है।
पत्र आते ही कहीं खुशी तो कहीं नाराजगी
इधर बुधवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से तीनों नेताओं के लिए एक पत्र जारी हो गया। इसमें कहा गया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देशानुसार कांग्रेस का प्रचार प्रसार करें। पत्र संगठन प्रभारी चंद्रप्रभाष शेखर की ओर से जारी किया गया। पत्र आते ही बागी नेताओं के समर्थकों में खुशी छा गई। वहीं जिनका नुकसान हुआ था, उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। दक्षिण विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े राजेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष पनपेगा। इधर कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता विवेक गुप्ता के अनुसार माया त्रिवेदी, जयसिंह दरबार और दिनेश जैन को प्रचार-प्रसार का जिम्मा जरूर दिया गया है। मगर पार्टी में अधिकृत वापसी को लेकर कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।
पहले भी मना लिया था
ऐसा पहली बार नहीं है कि कांग्रेस में बागी प्रत्याशियों को वापस लिया जा रहा है। दिनेश जैन ने 2013 का चुनाव भी निर्दलीय लड़ा था। इसमें भी पार्टी की हार हुई थी। बाद में उन्हें वापस पार्टी में ले लिया गया। इसी तरह 2008 में जयसिंह दरबार भी दक्षिण से निर्दलीय चुनाव लड़े और हारे थे। बाद में इनकी भी घर वापसी हो गई थी।
87 हजार वोटों पर नजर, बलाई समाज के समर्थन की उम्मीद
दरअसल कांग्रेस बागी नेताओं को पार्टी में इसलिए वापस लाना चाहती है कि क्यों इन्हीं नेताओं ने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी को 87 हजार वोटों का नुकसान पहुंचाया था। पार्टी अब इन वोटों को खोना नहीं चाहती। बलाई समाज के साढ़े तीन लाख वोटरों से भी कांग्रेस को खासी उम्मीद है। इन सभी सियासी समीकरणों के कारण ही उज्जैल- आलोट संसदीय सीट पर कांटे का मुकाबला माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बागियों ने भाजपा को भितरघात ने खासा नुकसान पहुंचाया था।

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