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मसल्स की गंभीर बीमारी को ठीक करेगी ये थेरेपी, 14 करोड़ में मिलेगी सिर्फ एक खुराक

यूएस फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने शुक्रवार को स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी के लिए एक खास तरह की थेरेपी को अप्रूव कर दिया है। स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी (एसएमए) जैसी गंभीर बीमारी के लिए एक्पर्ट अब जीन-थेरेपी का सहारा ले सकेंगे। एक्सपर्ट बताते हैं कि, जोलेगेंस्मा नामक इस नई थेरेपी के जरिये एक ही खुराक में इस बीमारी का इलाज हो जाएगा और इस बीमारी के इलाज के लिए मरीज को 21 लाख डॉलर (करीब 14 करोड़ रुपये) चुकाने होंगे।
बताते चलें कि, स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी (एसएमए) एक गंभीर बीमारी है। यह मसल्स खराब करने वाली एक रेयर बीमारी है, जो सिवियर हो जाने पर बच्चों को 2 साल का होने से पहले ही मार देती है। हालांकि जीन-थेरेपी के जरिए इस गंभीर बीमारी का इलाज संभाव है, लेकिन इसकी कीमत जानने के बाद लोग इसे अब तक का सबसे महंगा इलाज बता रहे हैं। एसएमए के इलाज के लिए पहले भी कई ड्रग्स विकसित किए जा चुके हैं, जिनकी एक खुराक की कीमत लगभग दस डॉलर तक ही रही होगी।
क्या है स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी
स्पाइनल मस्क्युलर अट्रॉफी एक तरह का न्यूरोमस्क्युलर डिसऑर्डर है। इसमें मरीज की शारीरिक क्षमता धीरे-धीरे घट जाती है और वह चल-फिर भी नहीं पाते। दुनियाभर में पैदा होने वाले 11 हजार बच्चों में से एक एसएमए से पीड़ित होता है। कई बार इस बीमारी के कारण दो साल की उम्र में ही बच्चों की मौत हो जाती है। इसके इलाज के लिए अब तक स्पिनरजा नामक दवा का इस्तेमाल होता रहा है। इसका उपचार करीब दस सालों तक चलता है और इस इलाज पर लगभग 40 लाख डॉलर (करीब 27 करोड़ रुपये) तक खर्च हो जाते हैं।
क्या कहती हैं थेरेपी बनाने वाली कंपनी
जोलेगेंस्मा थेरेपी को विकसित करने वाली कंपनी नोवार्टिस का कहना है कि, पहले ही उन्होंने इस थेरेपी की कीमत आधी घटाकर बताई है। कंपनी के सीईओ वास नरसिम्हन ने कहा कि- 'हम सही रास्ते पर हैं और एक दिन इस बीमारी को पूरी तरह खत्म कर पाने जरूर सफल होंगे।'
चार महीने के बच्चे पर सफल रहा था ट्रायल
ओहायो की रहने वाली टीना व टोरंस एंडरसन के बेटे मलाची एसएमए से पीड़ित थे। साल 2015 में उन्हें इस थेरेपी के बारे में पता चला था। उस वक्त बच्चा सिर्फ चार महीने का था। डॉक्टर ने एंडरसन दंपती को जवाब दे दिया था। इसके बाद मलाची को जोलेंगस्मा के क्लीनिकल ने ट्रायल के लिए चुना था। मलाची अब वह चार साल का हो चुका है और पूरी तरह से स्वस्थ है। वह खुद अपनी व्हीलचेयर भी चला पाता है। एक्सपर्ट उम्मीद कर रहे हैं कि जीन थेरेपी मरीजों के लिए कारगर साबित होगी।

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