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इजरायल के जासूसी उपग्रह की तर्ज पर बनाया गया है EMISAT, जानिए इसकी खासियतें

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दुनिया में भारत नया इतिहास रचने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से आज सुबह 9.27 पर भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लांच व्हीकल (पीएसएलवी) द्वारा इलेक्ट्रॉनिक इंटेलीजेंस उपग्रह एमिसैट का प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही कई देशों के सैटेलाइट भी भेजे गए हैं।
एमिसैट का प्रक्षेपण रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए किया जा रहा है। दुश्मन पर नजर रखने के लिहाज से एमिसैट काफी महत्वपूर्ण है। इसका खास मकसद पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखना है। यह उपग्रह सीमा पर रडार और सेंसर पर निगाह रखेगा। इंसानी गतिविधियों के अलावा यह संचार से जुड़ी किसी भी तरह की गतिविधि पर नजर रखने के मकसद से तैयार किया गया है।
सूत्रों का कहना है कि पृथ्वी की निचली कक्षा में यह 436 किलो का उपग्रह निगरानी और दुश्मन के रडार साइट्स पर पैनी नजर रखेगा। अब तक भारत अर्ली वॉर्निंग प्लेटफार्म के रूप में हवाई जहाज का उपयोग कर रहा था। मगर, यह उपग्रह दुश्मन के राडार का पता करने के लिए स्पेस आधारित प्लेटफार्म मुहैया कराएगा।
एमिसेट मुख्य रूप से प्रसिद्ध इजराइली जासूसी उपग्रह SARAL (Satellite with ARgos and ALtika) पर आधारित है। यह बर्फ, बारिश, तटीय क्षेत्रों, जमीन, जंगलों को बिना किसी मुश्किल के स्कैन कर सकेगा। लिहाजा, सुरक्षाबलों को यह दुश्मनों से हर स्थिति में आगे रख सकेगा।
बताया जा रहा है कि एमिसैट को तैयार करने में इसरो को आठ साल का समय लगा। हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान कार्यशाला में इसे तैयार किया गया। सबसे पहली बार एमिसैट का जिक्र रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2013-14 में किया गया था। इसके पेलोड को प्रोजेक्ट कौटिल्य के तहत डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च लैबोरेट्री (DLRL) हैदराबाद में विकसित किया गया है।
यह है खासियत
 एमिसैट उपग्रह का वजन 436 किलो है।
- दुश्मन के राडार और सेंसर पर निगरानी बढ़ेगी।
दुश्मन के इलाकों का सटीक इलेक्ट्रॉनिक नक्शा बनाने में मददगार
- क्षेत्र में सक्रिय मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जानकारी देगा।
मोबाइल और संचार उपकरणों के जरिए होने वाली बातचीत को डिकोड करेगा।
- बर्फ, बारिश, तटीय क्षेत्रों, जमीन, जंगलों को आसानी से स्कैन कर सकेगा।
पीएसएलवी का भरोसा कायम
बताते चलें कि इसरो सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए बीते 20 साल से पीएसएलवी का इस्तेमाल कर रहा है। यह दुनियाभर के सबसे भरोसेमंद लॉन्चिंग व्हीकल्स में से एक है। इसके जरिए चंद्रयान-1, मंगल मिशन, स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपरिमेंट, आईआरएनएसएस जैसे अनेकों मिशन के लिए उपग्रहों को लांच किया गया है।
पीएसएलवी ने 19 देशों के 40 से अधिक उपग्रहों को भी प्रक्षेपित किया है। 2008 में पीएसएलवी ने एक प्रक्षेपण के तहत 10 उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने का रिकॉर्ड बनाया था।

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