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बंगाल में 65 हजार सेक्स वर्कर किसी को नहीं देंगी वोट, जानिए क्यों लिया उन्होंने यह फैसला

कोलकाता। लोकसभा चुनाव के बीच पश्चिम बंगाल के लगभग 65,000 यौनकर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक संगठन ने ऐलान किया है कि वे नोटा का बटन दबाएंगे। बंगाल में यौनकर्मियों की शीर्ष संस्था दरबार महिला समिति (DMSC) का कहना है कि हर चुनावी मौसम में राजनीतिक दलों द्वारा किए जाने वाले 'झूठे वादे' से उसके सदस्यों का मोहभंग हो गया है। लिहाजा, कई यौनकर्मी इस चुनाव में नोटा का बटन दबाएंगे।
संगठन ने कहा कि यौन कर्मियों को मजदूर के रूप में पहचानने दी जाए। इसके आधार पर वे तय करेंगे कि किसे वोट देना है। यौनकर्मी श्रम कानूनों के तहत अपने पेशे को मान्यता नहीं देने की शिकायत करते हैं। संगठन अनैतिक तस्करी रोकथाम अधिनियम के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग और सरकार के द्वारा पेश किए गए पुनर्वास कार्यक्रमों के कम होने पर भी शिकायत करता रहा है।
बताते चलें कि राज्य में 42 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है, जिसमें से पहले चरण में 11 अप्रैल को दो निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ है और गुरुवार को तीन और सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। DMSC के सचिव भारती दत्ता ने बताया कि यह हमारी लंबे समय से मांग है कि यौनकर्मियों को मजदूर के रूप में मान्यता दी जाए और उन्हें श्रम आयोग के दायरे में लाया जाए। हमने 2011 में (विधानसभा चुनावों के दौरान) इस मांग को उठाया था, लेकिन इस पर अभी तक कुछ भी नहीं हुआ है।
उन्होंने यह बात ओल्ड नॉर्थ कोलकाता बिल्डिंग में स्थित संगठन के कार्यालय में कही। यह इमारत सोनागाछी से एक किलोमीटर दूर है, जहां सैकड़ों बहुमंजिला वेश्यालय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अनैतिक तस्करी रोकथाम अधिनियम का कुछ लोगों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे यौनकर्मियों का जीवन मुश्किल हो रहा है। इन पर शिकंजा कसा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि DMSC का स्व-नियामक बोर्ड को राज्य सरकार के तहत पंजीकृत होना चाहिए, ताकि यह बदमाशों और दलालों द्वारा पैदा की जाने वाली चुनौतियों से निपट सके। यह बोर्ड कम उम्र की लड़कियों और इस पेशे में अनिच्छा से लाई जाने वाली महिलाओं को इस पेशे में जाने से रोकता है।
DMSC में पूरे बंगाल की 65,000 यौनकर्मी जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 11,000 सोनागाछी में हैं। दत्ता ने कहा कि हमने पूरे बंगाल में सभी उम्मीदवारों के पास अपनी मांगों को लेकर प्रतिनिधियों की एक टीम भेजी है। हमने सर्वसम्मति से उस पार्टी को वोट देने का फैसला किया है, जो हमारी मांगों पर ध्यान दें। अन्यथा, हम नोटा की बटन दबाएंगे।
बंगाल के नादिया जिले से पांच साल पहले सोनागाछी आईं एक सेक्स वर्कर ने कहा कि यह बड़े दुख की बात है कि हमारे बच्चों को अभी भी अधिकांश स्कूलों में पढ़ने या कार्यस्थलों में काम करने की अनुमति नहीं है। हमारे पेशे या जिस स्थान पर हम रहते हैं, उसकी वजह से सामाजिक कलंक हमेशा उनके साथ जुड़ा रहता है। हम चाहते हैं कि इस स्थिति में बदलाव हो।
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