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मसूद अजहर पर UN में फैसला कल, भारत ने चीन, तुर्की, सऊदी के साथ की तगड़ी घेराबंदी

नई दिल्ली। पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाने में 48 घंटे से भी कम समय बचा है। यह प्रस्ताव 13 मार्च को लाया जाएगा। इस बीच नई दिल्ली ने प्रमुख भूमिका निभाने वाले देशों- अमेरिका, सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और बीजिंग से प्रस्ताव पर समर्थन के लिए कहा है।
विदेश सचिव विजय गोखले ने अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट माइकल पोम्पियो से वॉशिंगटन में मुलाकात की। वहीं सऊदी के मंत्री अदेल अल-जुबैर ने पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात के तीन हफ्तों बाद भारत में अपनी दूसरी यात्रा पूरी की। बालाकोट हवाई हमले के बाद मोदी ने सोमवार को टेलीफोन पर दो विदेशी नेताओं से दूसरी बार बात की। उन्होंने यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान और तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से चर्चा की।
चीन ने कहा जिम्मेदार रवैया अपनाया
चीन, सऊदी, यूएई और तुर्की सभी पाकिस्तान के करीबी साझेदार हैं। पाकिस्तान को प्रभावित करने में अमेरिका महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता हैं। इस बीच, बीजिंग ने सोमवार को 1267 समिति से कहा कि उसने "जिम्मेदार रवैया" अपनाया है और यह समाधान "केवल जिम्मेदार चर्चा के माध्यम से" संभव है। चीन ने कहा कि पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव को कम करने में अपनी बातचीत में सुरक्षा मुद्दों को एक महत्वपूर्ण विषय बनाया गया है।
बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी जिसके बाद अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में एक प्रस्ताव पेश किया था। रिपोर्टों के अनुसार 13 मार्च को यूएनएससी की '1267 समिति' द्वारा इस प्रस्ताव को उठाये जाने की उम्मीद है।
सऊदी ने दिया भरोसा
इस्लामाबाद में चार दिन रहने के बाद भारत आए अदेल अल-जुबिर ने इस बात पर सहमति जताई कि सऊदी अरब और भारत को बिना किसी भेदभाव के सभी आतंकवादियों के खिलाफ "अपरिवर्तनीय, सत्यापित और विश्वसनीय कदम" के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए। बयान में पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं था, लेकिन भारत ने कहा कि आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों के खिलाफ पाकिस्तान विश्वसनीय और साबित की जा सकने वाली कार्रवाई करे।
अमेरिका ने कहा ठोस कार्रवाई की जरूरत
उधर, वाशिंगटन डीसी में विदेश सचिव गोखले ने माइक पोम्पियो से मुलाकात की, जिन्होंने सीमा पार आतंकवाद के संबंध में भारत की चिंताओं के बारे में अपनी समझ व्यक्त की। वे इस बात पर सहमत हुए कि पाकिस्तान को आतंकवादी ढांचे को खत्म करने और उसके क्षेत्र में सभी आतंकवादी समूहों को पनाह देने से इनकार करने के लिए ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि जो लोग किसी भी रूप में आतंकवाद का समर्थन करते हैं या उन्हें रोकते हैं, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
मोदी ने किया यूएई का शुक्रिया
यूएई क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायेद के साथ फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने इस महीने के शुरूआत में अबू धाबी में ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद में भारत के विदेशमंत्री को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में संबोधित करने के लिए भारत को दिए गए निमंत्रण के लिए क्राउन प्रिंस को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की दलीलों के बावजूद भारत को दिए गए न्योते को वापस नहीं लेने की संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका आधिकारिक स्वीकृति थी। मोदी ने उम्मीद जताई कि यह ऐतिहासिक भागीदारी शांति और प्रगति के सामान्य उद्देश्यों को प्राप्त करने में योगदान करेगी।
तुर्की ने जताई संवेदना
विदेश मंत्रालय ने कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने भारत में हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों के पीड़ितों के साथ संवेदना जाहिर की। उन्होंने हमलों में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। उन्होंने सभी संबंधित देशों द्वारा आतंकवाद के खिलाफ तत्काल, और अपरिवर्तनीय कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया।

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