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सिंधिया परिवार के दो सदस्य एक ही पार्टी से एक साथ चुनाव लड़ेंगे

ग्वालियर। प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया यदि ग्वालियर से चुनाव मैदान में उतरीं तो यह सिंधिया राजपरिवार में यह दूसरा अवसर होगा जब एक ही पार्टी से एक साथ दो सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों से चुनाव लडेंगे। अब से पहले 1971 में ही ऐसा हुआ है। जब राजमाता वियजाराजे सिंधिया भिंड और उनके पुत्र माधवराव सिंधिया गुना संसदीय सीट से जनसंघ के टिकट से मैदान में उतरे और एक साथ चुनाव जीते। रविवार को ग्वालियर में एक नाटकीय घटनाक्रम में जब जिला कांग्रेस और सिंधिया समर्थकों ने जिस तरह से गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की धर्मपत्नी प्रियदर्शिनी राजे को ग्वालियर से चुनाव लड़ाए जाने का प्रस्ताव पारित किया तो सियासतदार हैरान रह गए।
कारण यह कि सिंधिया परिवार के सदस्य राजनीतिक अखाड़े में कदम पूरी संजीदगी के साथ ही रखते हैं। कभी किसी भी चुनाव में हड़बड़ी में ऐसा कदम नहीं उठाया, जिससे परिवार की साख दांव पर लगे। दरअसल सिंधिया परिवार ने राजनीति के लिए कुछ स्व-निर्धारित नियम बना रखे हैं।
इन नियमों में से एक नियम यह भी है कि कभी भी दो सदस्य एक ही पार्टी से अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों से मैदान में नहीं उतरे हैं। अपवाद स्वरूप 1971 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया भिंड और उनके पुत्र माधवराव सिंधिया गुना संसदीय क्षेत्र से एक ही दल भारतीय जनसंघ से चुनाव मैदान में उतरे और जीते।
कभी भी नहीं लड़े आपस में : खास बात यह भी है कि दो परस्पर विरोधी दल भाजपा व कांग्रेस में बंटा राजपरिवार कभी भी एक-दूसरे के सामने नहीं आया। राजमाता विजयाराजे सिंधिया की मध्यप्रदेश में राजनीतिक विरासत संभालने वाली यशोधरा राजे सिंधिया और स्व.माधवराव सिंधिया की राजनीतिक विरासत संभालने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया कभी भी एक- दूसरे के सामने चुनावी मैदान में नहीं उतरे। 2007 के उप और 2009 के मुख्य चुनाव में जब यशोधरा राजे सिंधिया ग्वालियर से भाजपा की प्रत्याशी बनीं तो उनके सामने महल का कोई और सदस्य सामने नहीं आया।
इसलिए बना रखा है नियम
ग्वालियर में सिंधिया परिवार अपने तिलिस्म को कायम रखने के फेर के लिए कोई बड़ा जोखिम नहीं उठाते। यही कारण है कि एक साथ एक ही पार्टी से चुनावी मैदान में नहीं उतरते। जानकारों के अनुसार दो जगह से जीत के फेर में चूक की गुंजाइश बनेगी। यदि चूक हो गई तो फिर आगे के लिए सिंधिया परिवार के सदस्यों के कभी न हारने का तिलिस्म भी टूट जाएगा।
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