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भारत और अमेरिका मिलकर बनाएंगे अत्याधुनिक लड़ाकू मानव रहित विमान

वाशिंगटन। भारत के साथ रक्षा संबंधों को एक पायदान और ऊंचा उठाते हुए अमेरिका ने साथ मिलकर लघु आकार के लेकिन अति प्रभावी मानवरहित विमान (यूएवी) का विकास करने की घोषणा की है। साथ ही हल्के छोटे हथियार बनाने की तकनीक विकसित करने के लिए दोनों देश मिलकर कार्य करेंगे। इतना ही नहीं दोनों देश लड़ाकू विमानों के रखरखाव का कार्य भी साथ मिलकर करेंगे। यह बात अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन की वरिष्ठ अधिकारी ने कही है।
अमेरिका की तरफ से यह बयान हाल ही में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की रक्षा तकनीक और व्यापार संभावनाओं पर हुई बैठक के बाद आया है। बैठक में दोनों देशों के उद्योगों के मिलकर कार्य करने और अगली पीढ़ी की तकनीक विकसित करने पर बल दिया गया था। पेंटागन के रक्षा मामलों की उप सचिव एलेन लॉर्ड ने कहा, लघु आकार के यूएवी विकसित करने की संभावनाओं पर दोनों देश मिलकर कार्य कर सकते हैं।
लॉर्ड ने भारत के रक्षा उत्पादन मामलों सचिव अजय कुमार के साथ दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक की संयुक्त रूप से अध्यक्षता की थी। बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। एलेन लॉर्ड ने कहा, हम लड़ाकू विमानों की सहायता के लिए कम लागत वाला प्रभावी तंत्र विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। तीन उद्देश्यों को ध्यान में रखकर यह यूएवी विकसित किया जाएगा।
आपदा की स्थिति में यह यूएवी मानवीय सहायता उपलब्ध कराने और राहत कार्य में मदद करेगा। सीमा पार कार्रवाई के लिए और कार्रवाई के दौरान जानकारियां देने का कार्य करेगा। गुफाओं और सुरंगों में जाकर वहां की जानकारी देने में सक्षम होगा। यह यूएवी मौजूदा तकनीक वाले यूएवी से 40 प्रतिशत हल्का और ज्यादा प्रभावी तरीके से कार्य करने में सक्षम होगा।
ड्रोन के विकास के संबंध में अमेरिकी वायुसेना की शोध प्रयोगशाला और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के बीच विचार-विमर्श हुआ है। अप्रैल में दोनों संस्थाएं एक तकनीक योजना प्रपत्र को साझा करेंगी। एलेन लॉर्ड ने बताया कि हम सितंबर में इन परियोजनाओं पर समझौता करने की ओर बढ़ रहे हैं। इस परियोजना में तकनीक विकास के साथ ही औद्योगिक निर्माण में भी भारत के साथ कार्य किया जाएगा।
एलेन लॉर्ड ने कहा, हम दोनों देशों के लिए उपयोगी तकनीक का विकास करेंगे। इससे हमारी युद्ध लड़ने की क्षमता में इजाफा होगा। यह हमारी सरकार, हमारी शोध संस्थाओं और हमारी औद्योगिक इकाइयों के बीच सहयोग की बहुत बड़ी और प्रभावशाली योजना है। इसका दोनों देशों को बड़ा लाभ होगा। इस सिलसिले में अगली बैठक सितंबर में भारत में होगी।
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