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प्रोफेसर की हत्या से पाकिस्तान में फिर गर्माया ईश निंदा कानून का मामला

इस्लामाबाद। पंजाब प्रांत में इंग्लिश के प्रोफेसर की हत्या ने एक बार फिर पाकिस्तान में ईश निंदा कानून के मामले को गर्मा दिया है। देश में विवादास्पद ईश निंदा कानून लागू है, जिसके तहत इस्लाम या मोहम्मद साहब की आलोचना करने या उनके खिलाफ कुछ भी बोलने पर मौत की सजा का नियम है। इस कानून की आड़ में कई बार निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है।
अतीत में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जब झूठे आरोप लगाकर लोगों को फंसाया गया या उनकी हत्या कर दी गई। ताजा मामला पाकिस्तान का बहावलपुर की एक यूनिवर्सिटी में इंग्लिश डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर खालिद हमीद की हत्या का है। छात्र खतीब हुसैन ने बुधवार 20 मार्च को खालिद की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। वह इस बात से नाराज था कि प्रोफेसर ने 21 मार्च को कॉलेज में छात्र-छात्राओं की एक साथ पार्टी रखी थी।
पूछताछ के दौरान खतीब ने पुलिस को कहा कि प्रोफेसर गैर-इस्लामी था। खतीब ने कहा कि सरकार ईश निंदा कानून का पालन नहीं कर रही थी और ईश निंदा करने वाले आजाद घूम रहे थे। लिहाजा मैंने कानून को अपने हाथ में लेकर प्रोफेसर की हत्या कर दी। रिकॉर्डेड वीडियो में छात्र ने कहा कि प्रोफेसर इस्लाम के खिलाफ काफी भौंकता था।
इस घटना से पहले कॉलेज के ही कुछ छात्रों से स्थानीय प्रशासन को खत लिखा था कि कॉलेज में होने वाले वार्षिक समारोह पर रोक लगा दी जाए। खत में लिखा गया था कि शैक्षणिक संस्थानों में लड़कियों के डांस के जरिए अश्लीलता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रोफेसर के बेटे वलीद खान सरकार की अकर्मण्यता पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि मेरे पिता पाकिस्तान की सरकार के कर्मचारी थी। उनकी हत्या कॉलेज परिसर के अंदर हुई, लेकिन सरकार ने न तो कोई चिंता जाहिर की और न ही घटना के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने सरकार के उस वादे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि सरकार चरमपंथ और कट्टरवाद से निपटेगी।
खान ने कहा कि यह पहले भी होता रहा है और आगे भी होता रहेगा, लेकिन कब तक? क्या भारत और अमेरिका के दबाव के कारण यह नेशनल एक्शन प्लान पर काम करेगी? क्या हमारी जान की कोई कीमत नहीं है? हालांकि, शैक्षणिक समुदाय ने ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग की आलोचना की है, लेकिन पाकिस्तान सरकार ने इस कानून को खत्म करने या इसमें सुधार के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं।
बताते चलें कि पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर और अल्पसंख्यक मामलों के पूर्व संघीय मंत्री शाहबाज भाटी की इस्लामाबाद में दिन-दहाड़े हत्या कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने ईशनिंदा कानून में सुधार का सुझाव दिया था।
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