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बस्तर में खास महत्व रखता है यह मेला, शामिल होते हैं 350 गांवों के देवी-देवता

कोंडागांव। बस्तर की आदिवासी संस्कृति में इस मावली मेले का विशेष महत्व है। कोंडागांव में सदियों से यह मेला लग रहा है और इस मेले की सबसे खास बात यह है कि करीब 350 गांवों के ग्रामीण अपने ग्राम देवता के साथ इस मेले में शामिल होने आते हैं। इस मेले की शोभायात्रा में जो नजारा दिखाई पड़ता है वह अपने आप में बेहद रोचक है साथ ही आस्था और विश्वास की इंसानी भावना को दर्शाता है।
तरह-तरह की यातनाएं खुद को देते हुए लोग यहां नजर आते हैं। किसी ने अपने गालों के आर-पास सूल घोंपा है तो कोई अपनी जीभ को ही सूजों से भेद कर आया है। लोग अपने आप को कंटीली जंगीरों से मारते हैं और दर्द की अनूभूति में देवता को अपने करीब महसूस करते हैं।
अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक स्थानीय परंपरा के लिए यह मेला पूरे देश में प्रसिद्घ है। यहां बस्तर की ऐतिहासिक, पारंपरिक, आदिवासियों की सांस्कृतिक,धार्मिक छटा दिखाई देती है।
आस्था के अनुरूप देवी-देवताओं के अद्भुत रूपों का प्रदर्शन होता है। क्षेत्रवासियों को कोंडागांव के मावली मेले का वर्ष भर इंतजार रहता है। बस्तर की संस्कृति व परंपरा से परिचित होने के लिए देश-विदेश से शैलानी भी मेले में पहुंचते हैं। कोंडागांव मेला सप्ताह भर का होता है। जो मंगलवार से शुरू हो कर रविवार तक चलेगा।
मेले के पहले दिन कोंडागांव के कुम्हारपारा स्थित बूढ़ी माता मंदिर में पटेल गांयता पुजारी व सभी ग्रामीण एकत्रित होकर ढोल-नगाड़े, मोहरीबाजा आदि पारंपरीक वाद्य यंत्रों की धुन के साथ बूढ़ी माता की पालकी लेकर मेला स्थल पहुंचते हैं।
बूढ़ी माता या डोकरी देव के आगमन के बाद नगर में आगंतुक देवी-देवताओं का स्वागत सत्कार होता है। इसके पश्चात मेले में पलारी से आई देवी पलारीमाता द्वारा मेला स्थल का फेरा लगाया जाता है।
बाद में अन्य सभी देवी देवताओं, लाट, अंगा, डोली आदि मेला की परिक्रमा करते हैं। मेले में फेरे के दौरान कुछ देवी-देवता लोहे की कील की कुर्सियों में विराजमान रहते हैं। मेला परिक्रमा के पश्चात देवी-देवता एक जगह एकत्रित होकर अपनी अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करते हैं। जिसे देव खेलाना या देव नाच कहते हैं।
इस पारंपरिक मेले में अब व्यवसायिकता का तड़का भी लगने लगा है। मीना बाजार की तरह कई तरह के झूले यहां लगे हैं साथ ही सरकारी स्तर पर चौपाटी और हस्तशिल्प प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया है। यहां लकड़ी, बांस, बेलमेटल सहित कई तरह के हस्तशिल्प उत्पाद लोगों को मिल रहे हैं।

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