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11 बजे पेश होगा बजट, मध्यम वर्ग के लिए हो सकती हैं राहत की घोषणाएं

नई दिल्ली। वित्त मंत्री पीयूष गोयल शुक्रवार को लोकसभा में अंतरिम बजट पेश करेंगे। लोकसभा चुनाव के पहले पेश हो रहे इस बजट का मूल्य आम बजट से कहीं ज्यादा होगा। अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग के साथ ही कार्पोरेट्स के लिए टैक्स में छूट की घोषणा की जा सकती है। साथ ही कृषि और छोटे उद्योगों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणाएं की जा सकती हैं। हालांकि यह बजट महज चार महीने के लिए लेखानुदान है लेकिन गोयल इसमें अधिक घोषणाएं कर परंपराएं तोड़ सकते हैं। गोयल पहले भी कह चुके हैं कि वह परंपराओं से आगे जाएंगे क्योंकि कृषि क्षेत्र और इंतजार नहीं कर सकता।
सूत्रों के मुताबिक बजट में आयकर छूट की सीमा मौजूदा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की जा सकती है। कार्पोरेट जगत कर की उच्च सीमा को 30 से 25 फीसदी करने की मांग करता रहा है उसे भी इस बजट में सरकार से काफी उम्मीदें हैं।
मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की हुई हार का असर भी बजट में दिखाई देगा। सरकार किसानों के लिए भी बड़ी घोषणाएं कर सकती है। ओडिशा की कालिया योजना और तेलंगाना की रायतुबंधु योजनाओं की तरह किसानों को प्रति हैक्टेयर 15 हजार रुपए की सीधे सहायता की घोषणा की जा सकती है।
इसके अलावा ब्याज मुक्त कर्ज और मामूली प्रीमियम वाली फसल बीमा योजना लाई जा सकती हैं। मप्र में भाजपा शासन में लागू की गई भावांतर योजना को भी नए रूप में पेश किया जा सकता है। इस योजना में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार की कीमत के अंतर का भुगतान सरकार करती है।
किसानों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के उपायों की घोषणा भी संभव है। नोटबंदी और जीएसटी से प्रभावित हुए छोटे उद्योगों के लिए भी सरकार राहत दे सकती है। हालांकि जीएसटी राजस्व में कमी के कारण इससे बजट घाटा बढ़ सकता है।
सरकार के लिए राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी पर रखना कड़ी चुनौती होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि प्रत्यक्ष कर की वसूली बढ़ाकर घाटा पूरा किया जाएगा। जीएसटी राजस्व केवल अप्रैल और अक्टूबर माह में ही एक लाख करोड़ रुपए से अधिक हुआ है बाकी महीनों में यह 94000 से 97000 हजार करोड़ रुपए तक ही हुआ है।
जीएसटी का लक्ष्य हर माह 1.12 लाख करोड़ रुपए है। सरकार के लिए हर वर्ग को लुभाने के लिए यह आखिरी मौका है। रेलवे की चालू स्कीमों को मिलेगी रफ्तार बजट में रेलवे की चालू योजनाओं और स्कीमों के लिए बेहतर बजटीय आवंटन होने की संभावना है। रेल मंत्री पीयूष गोयल के पास ही वित्त मंत्रालय का प्रभार है। वह पहले रेलमंत्री हैं जिन्हें रेल बजट के बजाय सीधे आम बजट पेश करने का मौका मिला है। रेल मंत्रालय के अफसरों की मानें तो बजट में रेलवे के लिए कोई नई स्कीम या योजना आने की संभावना बहुत कम है। ज्यादातर चालू योजनाओं और स्कीमों को ही अधिक धन आवंटन पर जोर रहेगा।

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