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ट्रेड यूनियनों की दो दिनी हड़ताल के पहले दिन बंगाल में छुटपुट हिंसा

नई दिल्ली। केंद्र की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ वामदलों से जुड़ी 10 ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मंगलवार से देशभर में 48 घंटे की हड़ताल शुरू हुई। हालांकि इसका असर वाम दलों के प्रभाव वाले राज्यों-पश्चिम बंगाल व केरल में ही ज्यादा रहा। बंगाल में छुटपुट हिंसा भी हुई। हालांकि देश के अधिकांश राज्यों में इसका कोई असर नहीं पड़ा। कुछ बैंक संगठनों के इसमें शामिल होने से कामकाज प्रभावित हुआ।
ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ 8 और 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसे "भारत बंद" का कहा जा रहा है, लेकिन अधिकांश राज्यों में इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। वाम दल शासित केरल हड़ताल के दौरान स्कूल-कॉलेज बंद रहे और बैंक कामकाम ठप रहा। दफ्तरों में कम उपस्थिति रही, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
पांच राज्यों में पूरा बंद
एटक की महासचिव अमरजीत कौर ने बताया कि पांच राज्यों-मणिपुर, मेघालय, ओडिशा व केंद्र शासित पुडुुचेरी में पूरी तरह बंद रहा, जबकि कर्नाटक, दिल्ली, गोवा, बंगाल, में शतप्रतिशत कर्मचारी हड़ताल पर रहे। मुंबई में 32 हजार ट्रांसपोर्ट कर्मी हड़ताल पर रहेमुंबई ट्रेड यूनियन हड़ताल के साथ ही 32 हजार से ज्यादा सरकारी ट्रांसपोर्ट कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इससे रोजाना यात्रा करने वाले 25 लाख से ज्यादा यात्री परेशान हुए।
एसबीआई पर असर नहीं
दो अग्रणी बैंक यूनियन हड़ताल में शरीक हुए, इससे बैंकिंग कारोबार पर असर पड़ा। हालांकि एसबीआई व निजी क्षेत्र की बैंकों पर कोई असर नहीं पड़ा, क्योंकि सात अन्य यूनियन हड़ताल में शामिल नहीं हुए थे। ओडिशा में रेल रोकोओडिशा में सड़क व रेल यातायात पर असर पड़ा। ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर, कटक, पुरी, बालासोर, जलेश्वर, भद्रक, संबलपुर, बेहरामपुर व पारादीप में रेलें रोकीं। इस कारण दर्जन भर से ज्यादा ट्रेनें देरी से चलीं।
बंगाल में स्कूल बस पर पथराव
पश्चिम बंगाल में हड़ताल के दौरान हिंसा की छुटपुट घटनाएं हुई। एक स्कूल बस पर पथराव व कई स्थानों पर तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। हड़तालियों ने पीएम के पुतले फूंके। हावड़ा, सिलीगुड़ी, बर्धमान, बीरभूम, उत्तरी व दक्षिण 24 परगना जिलों में तृणमूल व हड़ताली कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं, क्योंकि वह जबर्दस्ती बंद करा रहे थे। कुछ स्थानों पर ट्रेनें रोकी गईं।
20 करोड़ श्रमिक-कर्मचारी शामिल
10 ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से इस बंद का आह्वान किया है। इन संगठनों का आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार ने श्रमिक कल्याण के कदम उठाने के बजाए दमनकारी नीतियां अपनाईं। उनका दावा है कि हड़ताल में 20 करोड़ कर्मचारी शामिल हुए।
बैंक व दूरसंचार कर्मी हड़ताल पर
बंद सह हड़ताल को सरकारी बैंक कर्मियों व दूरसंचार कर्मियों ने भी समर्थन किया। उनके अलावा देश के कई किसान और शिक्षक संगठन भी शामिल हैं। ये हैं प्रमुख मांगेंवेतन वृद्धि, रोजगार, पदोन्नति के साथ-साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी सहित कई अन्य मांगें भी शामिल हैं।
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