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Ayodhya Case : सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की याचिका से झूमे मंदिर समर्थक, जगी मंदिर निर्माण की उम्‍मीद

अयोध्या। मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाए जाने की क्षीण पड़ती संभावना और कोर्ट में टलती सुनवाई के बीच मायूस मंदिर समर्थकों को झूमने का मौका मिल गया जब मंगलवार को केंद्र सरकार ने अधिग्रहीत परिसर का गैर विवादित स्थल रामजन्मभूमि न्यास को वापस सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।
मंदिर समर्थकों को उम्मीद है कि कोर्ट इस याचिका पर सकारात्मक फैसला करेगा और मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के अनुसार, यह मंदिर निर्माण की दिशा में साहसिक पहल है और इसके लिए केंद्र सरकार बधाई की पात्र है।
प्रतिष्ठित पीठ रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास के अनुसार, केंद्र सरकार राम मंदिर के साथ राष्ट्र मंदिर की प्रतिष्ठा के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल होने से यह सच्चाई और शिद्दत से परिभाषित हुई है।
मंदिर आंदोलन से जुड़े वशिष्ठ भवन धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. राघवेशदास कहते हैं, मंदिर निर्माण की संभावनाओं का द्वार कुछ इसी तरह से खुलना है और सरकार की यह पहल निर्णायक मुकाम हासिल करेगी। निष्काम सेवा ट्रस्ट के व्यवस्थापक महंत रामचंद्रदास के अनुसार, मोदी सरकार अपने हर वादे पर खरी उतर रही है।
अड़चनों के बावजूद सरकार ने मंदिर निर्माण की संभावना प्रशस्त कर प्रशंसनीय प्रयास किया है। गुरुद्वारा ब्रह्माकुंड के मुख्यग्रंथी ज्ञानी गुरुजीत सिह ने केंद्र सरकार की ताजा पहल को मंदिर निर्माण की नींव का पत्थर बताया।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि यह पहल बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी पर केंद्र में कांग्रेस की सरकार के रहते ऐसा संभव नहीं हुआ और अब मोदी सरकार ने मंदिर के प्रति आस्था का परिचय दिया है।
मुस्लिम करेंगे कारसेवा मंदिर निर्माण के लिए अभियान चलाने वाले भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रांतीय मंत्री बब्लू खान ने केंद्र की पहल को स्वागत योग्य बताया और दोहराया कि मंदिर निर्माण से राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी। उन्होंने कहा, संभावना के अनुरूप जिस दिन न्यास को अधिग्रहीत परिसर की भूमि सौंपी जाएगी, मुस्लिम उसी दिन से मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा करेंगे।
2.77 एकड़ के निस्तारण बिना संभव नहीं निर्माण रामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्रदास ने सरकार की इस पहल को स्वागत योग्य तो बताया पर स्पष्ट किया कि 2.77 एकड़ विवादित भूमि के निस्तारण के बिना मंदिर निर्माण संभव नहीं है।
मस्जिद के पक्षकारों ने कहा, नहीं एतराज बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब व मो. इकबाल ने कहा, विवादित 2.77 एकड़ जमीन छोड़कर हमें और भूमि से वास्ता नहीं है। इसका सरकार जैसा उपयोग करना चाहे करे, हमें कोई एतराज नहीं। बाबरी मस्जिद के दोनों पक्षकार यह बताना नहीं भूले कि केंद्र की ऐसी कोशिश चुनावी शोशेबाजी है।
निर्मोही अखाड़ा को वापस मिले भूमि मंदिर की पैरोकारी से जुड़े नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा, 1993 में अधिग्रहीत 67.77 एकड़ भूमि में से कुछ हिस्सा निर्मोही अखाड़ा का भी था और अधिग्रहण निरस्त करने की सूरत में संबंधित भूमि वापस निर्मोही अखाड़ा को मिलनी चाहिए।

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