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कमलनाथ सरकार के अनुपूरक बजट में किसान ऋण माफी के लिए 5000 करोड़ का प्रावधान

भोपाल। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद कांग्रेस सरकार ने अनुपूरक बजट पेश किया। ये वित्तीय वर्ष 208-19 का दूसरा अनुपूरक बजट है जिसमें जहां किसान कर्ज माफी योजना के लिए 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया, वहीं महाविद्यालय के शिक्षक संवर्ग को सातवां वेतनमान का एरियर देने के लिए 372 करोड़ रुपए और अतिथि शिक्षकों को मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया है।
वित्त मंत्री तरुण भनोट ने विधानसभा में अनुपूरक बजट प्रस्तुत किया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अभिभाषण के जरिए भनोट ने ये बजट प्रस्तुत किया। इस बजट में भावंतर भुगतान फ्लैट रेट योजना के लिए 1500 करोड़, फसल बीमा योजना के लिए 1026 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान के लिए 20 करोड़ रु. रखे गए हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अभिभाषण में कहा कि ये सरकार किसानों की ऋण माफी, अध्यात्म विभाग के गठन, कन्या विवाह निकाह योजना की राशि में वृद्धि, उद्योग नीति में परिवर्तन कर 70 फीसदी स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और पुलिसकर्मियों को साप्ताहिक अवकाश देने जैसे कई फैसले ले चुकी है जो इस बात के प्रमाण है कि जो कहा सो किया।
किसानों का कर्ज माफ किया
अभिभाषण में कहा कि इस सरकार ने काम संभालते ही राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों में अल्पकालीन फसल ऋण के रूप में पात्रता अनुसार पात्र पाए गए किसानों के 2 लाख की सीमा तक के फसल ऋण माफ कर दिए गए हैं। इसमें विद्युत नियामक आयोग का पुनर्गठन किया जाएगा। कृषि और घरेलू उपयोग के बिजली संबंधी झूठे प्रकरण वापस लिए जाएंगे। विद्युत अधिनियम की धारा 135 और 138 को जमानती बनाया जाएगा। ऊर्जा का भविष्य स्टोरेज में है इसकी दिशा में सरकार काम प्रारंभ करेगी। प्रदेश में सिंचाई क्षमता को अगले 5 साल में 65 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा। शिक्षा संस्थाओं में पेयजल की उपलब्धता और विद्युतीकरण की योजना शुरू की जाएगी। वन अधिकार अधिनियम के तहत अब तक जिन कब्जा धारियों को पट्टा नहीं मिला है उनको पट्टा दिलाया जाएगा और भूमि को कृषि योग्य बनाया जाएगा।
अनुसूचित जाति जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति छात्रावास वरण व्यवस्थाओं को व्यापक किया जाएगा महिला और बच्चों से जुड़े अपराधों पर बेहतर नियंत्रण त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अस्पतालों के प्रबंधन और संचालन को बेहतर बनाते हुए गुणात्मक सुधार किया जाएगा।
बिजली के लिए बजट
विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा दी जा रही निशुल्क बिजली की प्रतिपूर्ति के लिए 455 करोड़ों रुपए और टैरिफ सब्सिडी के लिए बिजली कंपनियों के लिए 655 करोड़ों रुपयों का प्रावधान किया गया है। वहीं बिजली कंपनियों के लिए पारेषण और वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने 280 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मंत्रियों दे सकेंगे 50 लाख से एक करोड़ की सहायता
इस बजट में होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा के तहत विशेष सेवाओं के लिए मानदेय मद में 100 करोड़ रुपए और मंत्रियों के सहायता अनुदान के लिए 50 लाख और मंत्रियों के स्वविवेक अनुदान के लिए 1 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग में एक वाहन खरीदने 10 लाख रुपए रखे गए हैं।
बजट में दावा किया गया कि सरकार द्वारा गरीब निराश्रित विकलांगों और कल्याणी महिलाओं की सामाजिक सुरक्षा को व्यापक रूप दिया जाएगा। गरीबों और श्रमिकों के लिए नया सवेरा कार्यक्रम लागू किया जाएगा और सामान्य वर्ग आयोग गठित होगा।
अवैध रेत खनन बंद होगा
सरकार ने अपने बजट में नई खनिज नीति बनाने की घोषणा की। दावा किया गया कि खनिजों के अवैध उत्खनन परिवहन और विक्रय की शक्ति से रोकथाम की जाएगी। प्रदेश की नदियों से रेत खनन का काम ठेकेदारों के बजाए स्थानीय बेरोजगारों की समितियों को दिया जाएगा। साहसिक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा। अगले 5 साल में नर्मदा परिक्रमा पथ अधोसंरचना का निर्माण और जरूरत के हिसाब से विश्राम स्थल बनाए जाएंगे। मां नर्मदा न्यास अधिनियम लाया जाएगा। साथ ही नर्मदा में अवैध उत्खनन और प्रदूषण की रोकथाम शक्ति से की जाएगी।
राज्यपाल ने अभिभाषण में कहा कि इस सरकार का रोड मैप और ब्लूप्रिंट वचन पत्र ही है। उसे आगामी 5 साल में पूरी शिद्दत और प्राथमिकता से अमल में लाने के लिए सरकार संकल्पित है। ये सरकार घोषणा के प्रचार में कम और काम ज्यादा में विश्वास करती है। सरकार का मानना है कहने से ज्यादा जरूरी काम करना है। सरकार को विश्वास है कि यह नई संस्कृति वक्त है बदलाव का को चरितार्थ कर प्रदेश को प्रगति के नए आयामों की ओर ले जाएगी।
आर्थिक संकट को स्वीकारा
सरकार ने प्रदेश में आर्थिक संकट को स्वीकार करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार ने कार्यभार ग्रहण किया तब राज्य सरकार गंभीर वित्तीय परिस्थिति से जूझ रही है। राजस्व आधिक्य में विगत 607 सालों से निरंतर कमी हुई है। 2018-19 के बजट अनुमान में तो यह लगभग नगण्य हो गया है। उसके बाद अनुपूरक बजट में नई योजना शुरू की गई है। इनकी गणना करें तो वास्तव में बजट राजस्व घाटे का हो गया है। बजट में उन्होंने ये भी जानकारी दी कि 2003-04 में राज्य का सकल ऋण 34672 करोड़ रुपए था जो 2018-19 में बढ़कर 1 लाख 87 हजार 636 करोड़ों रुपए हो गया। इसी प्रकार 2000 से 3000 में बकाया ऋण पर ब्याज 3207 करोड़ रुपए से बढ़कर 2018-19 में 12 हजार 867 करोड रुपए हो गया है।

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