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RBI के नए गवर्नर से पटेल के अधूरे काम पूरे करने समेत यह है चुनौतियां

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर शक्तिकांत दास के सामने न सिर्फ पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के अधूरे कामों का भारी भरकम एजेंडा है बल्कि उन्हें आरबीआई की साख सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसके अलावा नए गवर्नर से बाजार को उम्मीद है कि वो नकदी की किल्लत को भी खत्म करेंगे।
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर शक्तिकांत दास के सामने न सिर्फ पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल के अधूरे कामों का भारी भरकम एजेंडा है बल्कि उन्हें आरबीआई की साख सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इसके अलावा नए गवर्नर से बाजार को उम्मीद है कि वो नकदी की किल्लत को भी खत्म करेंगे।
आरबीआई और सरकार के बीच चल रहे विवाद को दास किस तरह से "डील" करते हैं यह तो वक्त बताएगा लेकिन उन्हें इस बात का खयाल रखना होगा कि उनके साथ अभी पूर्व गवर्नर की ही टीम होगी। इसमें पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य भी शामिल हैं जिन्होंने सरकार के हस्तक्षेप के खिलाफ सबसे पहले सार्वजनिक बयान दिया था।
माना जाता है कि पिछली बोर्ड की बैठक में जिन मुद्दों पर फैसला हुआ उसको लेकर आचार्य के अलावा आरबीआई के कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी असहज हैं। इनमें खासतौर पर आरबीआई के रिजर्व फंड के इस्तेमाल के मौजूदा नियमों में बदलाव को लेकर गठित होने वाली समिति का मुद्दा है जिस पर तनाव हो सकता है।
पिछली बैठक के बाद बताया गया कि केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय मिलकर समिति के सदस्यों को तय करेंगे लेकिन तकरीबन तीन हफ्ते बीत जाने के बावजूद समिति गठित नहीं हो पाई। पटेल इस प्रस्ताव के सख्त खिलाफ थे। इस बारे में दास के कदम पर सभी की नजर होगी।
दास को तत्काल जिस मुद्दे पर दो टूक फैसला करना होगा, वह होगा प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) का मसला। इसके दायरे से सरकारी बैंकों को बाहर निकालने के लिए क्या रास्ता अख्तियार किया जाता है। अभी यह सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा है। इसके दायरे में 11 बैंक हैं जो कर्ज नहीं बांट पा रहे हैं।
चुनावी वर्ष में सरकार को पता चल रहा है कि छोटे व मझोले उद्योगों को कर्ज नहीं मिल रहा है। सरकार चाहती है कि पीसीए नियमों में समीक्षा करते हुए कम से कम तीन चार बैंकों को अभी इसके दायरे से बाहर निकाला जाए ताकि वे कर्ज बांट सकें। इसी तरह से उन्हें ब्याज दरों को लेकर भी आरबीआइ और सरकार के बीच चल रहे खींचतान पर आम राय कायम करनी होगी।
इसके अतिरिक्त दास को बैंकिंग दिशानिर्देशों को लेकर चल रही बहस का हल भी ढूंढना होगा। खासतौर पर निजी बैंकों में प्रमोटर इक्विटी घटाने के मसले पर तुरंत निर्णय की आवश्यकता है। कोटक महिंद्रा बैंक और बंधन बैंक में प्रमोटर इक्विटी घटाने की समय सीमा काफी नजदीक आ गई है और दोनों ही बैंक आरबीआइ से समय में ढील देने की मांग कर चुके हैं।
बाजार को नए गवर्नर से नकदी किल्लत तुरंत दूर करने की अपेक्षा
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआई) ने मंगलवार को कहा कि पूर्व नौकरशाह शक्तिकांत दास की भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नए गवर्नर पद पर नियुक्ति से बाजार को काफी राहत मिली है। उद्योग संघ ने विश्वास जताया कि अर्थव्यवस्था में नकदी किल्लत को दूर करने के लिए वह तुरंत कदम उठाएंगे। आरबीआई गवर्नर पद से उर्जित पटेल के इस्तीफे के एक दिन बाद मंगलवार को रिजर्व बैंक के नए गवर्नर के रूप में दास की नियुक्ति की गई।
सीआईआई के प्रेसिडेंट राकेश भारती मित्तल ने कहा कि दास की नियुक्ति यह सुनिश्चित करती है कि स्थिरता बनी रहेगी। सरकार ने एक आर्थिक विशेषज्ञ का चुनाव कर अस्तव्यस्तता को टाला है और निवेशकों और उद्योग में विश्वास का संचार किया है। उन्होंने कहा कि उद्योग को यह विश्वास है कि बैंकिंग और गैर-बैंकिंग फाइनेंस सेक्टर में नकदी की किल्लत को दूर करने पर दास तुरंत ध्यान देंगे।
नकदी की यह किल्लत उद्योग के अन्य क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रही है। उद्योग और व्यापार और खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को आसानी से कर्ज मिल सकेगा।
फिक्की के प्रेसिडेंट रशेष शाह ने कहा कि वास्तविक ब्याज कम करने, नकदी की स्थिति में सुधार करने और विकास तथा रोजगार बढ़ाने की जरूरत है। वास्तविक अर्थव्यवस्था और एमएसएमई व हाउसिंग जैसे सेक्टरों में कर्ज बढ़ाना इस वक्त बहुत जरूरी है।
आरबीआई की विश्वसनीयता व स्वायत्तता बहाल करने की जिम्मेदारी : सुब्बाराव
आरबीआई के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने कहा कि उर्जित पटेल के वारिस पर संस्थान की विश्वसनीयता और स्वायत्तता बहाल करने की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पटेल पर एक सीमा से अधिक दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया। सरकार को इस घटनाक्रम पर मनन करना चाहिए।
उधर नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि आरबीआई की संस्थानिक क्षमता काफी मजबूत है और वह बाजार तथा अर्थव्यवस्था के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उन्होंने इन्क्लूसिव फाइनेंस इंडिया समिट के बाद कहा कि पटेल ने यद्यपि आरबीआइ गवर्नर के रूप में गत दो साल में आश्चर्यजनक काम किया, फिर भी आरबीआई का काम-काज किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है।
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