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संसद का शीतकालीन सत्र कुछ देर में होगा शुरू, PM बोले- कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच मंगलवार को संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हुआ। यह मोदी सरकार के कार्यकाल का अंतिम पूर्णकालिक सत्र होगा। यही वजह है कि सरकार इसे काफी अहम मान रही है।
सत्र में हिस्सा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह बेहद महत्वपूर्ण सत्र है। जनता के लिए अहमियत रखने वाले कई मुद्दे उठाए जाएंगे और मुझे भरोसा है कि संसद के सभी सदस्य इस भावना की कद्र करेंगे और आगे बढ़ेंगे। हमारी कोशिश है कि सदन में सभी मुद्दों पर चर्चा हो।
पीएम ने साथ ही यह भी कहा कि उम्मीद है कि शीत सत्र में सांसद जनकल्याण के मुद्दों पर समय लगाएंगे, खुद पर नहीं।
इससे पहले सोमवार को सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के सुचारू संचालन के लिए सभी दलों से सहयोग मांगा। साथ ही कहा कि जनता से जुड़े मुद्दों के लिए वह सदन में देर रात तक काम करने के लिए भी तैयार हैं।
66 लंबित बिलों पर होनी है चर्चा
11 दिसंबर, 2018 से आठ जनवरी, 2019 तक चलने वाले शीतकालीन सत्र में कुल 20 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस दौरान 66 लंबित बिलों पर चर्चा होनी है। 20 नए विधेयक भी पेश किए जाएंगे। सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सरकार ने अपने लंबित और जरूरी कामकाज से विपक्षी दलों को अवगत कराया।
सर्वदलीय बैठक की जानकारी देते हुए संसदीय कार्यमंत्री मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि सरकार ने विपक्ष के साथ कामकाज को लेकर चर्चा की है। तत्काल तीन तलाक सहित कई अहम बिलों को लेकर भी सहयोग मांगा गया है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष से कहा कि वह सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है।
इस सबके बीच विपक्ष भी सीबीआई, राफेल और आरबीआई जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है। बैठक से बाहर निकले गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्होंने सरकार के सामने राफेल पर जेपीसी के गठन और सीबीआइ पर चर्चा कराने की बात रखी है। बैठक में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव, लोक जनशक्ति पार्टी नेता चिराग पासवान, शिवसेना के नेता चंद्र कांत, आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह आदि मौजूद रहे।
हंगामेदार सत्र के आसार
कांग्रेस और विपक्षी दलों के रुख को देखते हुए शीतकालीन सत्र में सरकार की राह आसान नहीं दिखती है। विपक्ष के रुख से सत्र के दौरान जबर्दस्त हंगामे के आसार दिख रहे हैं। गोलबंद विपक्ष का प्रयास रहेगा कि पूरा सत्र राजनीति के आसपास ही केंद्रित रहे। वहीं सरकार तत्काल तीन तलाक विधेयक, मेडिकल काउंसिल जैसे विधेयकों को पार लगाना चाहेगी। राम मंदिर निर्माण को लेकर निजी विधेयक भी प्रस्तावित है, जो विपक्षी दलों के सामने बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर सकता है।
सत्र सफल बनाने में एकजुट प्रयास करे राजग
संसदीय सत्र में कामकाज के स्तर पर सरकार उन सभी मुद्दों के जरिये बढ़त बनाने की कोशिश करेगी जो जनता से जुड़ते हैं। सोमवार को राजग के घटक दलों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र सरकार, जनता और देशहित की दृष्टि से काफी अहम है और इसे उपयोगी बनाने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। बैठक में मौजूद शिवसेना सदस्य ने राम मंदिर का मुद्दा भी उठाया। शिवसेना ने कहा कि मामला कोर्ट में है और सरकार को इसे त्वरित हल करने का प्रयास करना चाहिए। इस पर सरकार को कानून का भी रास्ता देखना चाहिए।

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