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अब पुलिस ने मांगी एक करोड़ की रंगदारी, पहले भी खाकी पर लगे हैं कई बदनुमा दाग

नई दिल्ली । खाकी, जिस पर लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है, जब वह खुद अपराध में उतरती है तो सारी हदें पार कर देती है। खाकी पर बदनुमान दाग का नाता काफी पुराना है। पुलिस पर रिश्वत या सही कार्रवाई न करने के आरोप हमेशा लगते रहते हैं। खाकी का खेल यहीं तक सीमित नहीं है, लाखों-करोड़ों रुपये वसूलकर बदमाशों को शरण देना, रेप, हत्या व लूट जैसे गंभीर मामलों में भी पुलिस की भूमिका बढ़ती जा रही है। अब दिल्ली पुलिस के तीन पुलिसकर्मियों द्वारा एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। आइये जानते हैं खाकी पर दाग की कुछ ऐसी ही हैरतअंगेज कहानियां।
दिल्ली पुलिस के तीन कर्मियों ने मांगी एक करोड़ की रिश्वत
खाकी पर ताजा दाग देश की राजधानी दिल्ली पुलिस ने लगाया है। दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन ठगी के एक मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले का छठवां आरोपी प्रदीप पश्चिमी दिल्ली में रहता है। दिल्ली पुलिस के तीन पुलिसकर्मियों ने प्रदीप को उठा लिया और उसे किसी के घर पर बंधक बनाकर रख दिया। इसके बाद तीनों पुलिसकर्मियों ने उसकी पत्नी नेहा से प्रदीप को बचाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये मांगे। नेहा ने एक करोड़ रुपये देना स्वीकार कर लिया। रिश्वत की पहली किश्त के 11 लाख रुपये देने के लिए नेहा तीन लोगों के साथ मौर्य एन्क्लेव पहुंची, वहां पुलिसकर्मी भी सादे कपड़ों में आए थे। नेहा ने उनसे कहा कि वह एक बार अपने पति को देखकर विश्वास करना चाहती है कि वह उन्हीं के पास है। पुलिसवालों ने प्रदीप को दिखाने से इंकार कर दिया। इस पर नेहा के साथ लोगों और पुलिसकर्मियों में मारपीट हो गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पीसीआर सभी को लेकर थाने पहुंची तो एक करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का पूरा मामला उजागर हो गया।
पुलिस ने जमानती अपराधी को भगाया ऑस्ट्रेलिया
पानीपत के यमुनानगर में चार दिसंबर 2018 को पुलिस द्वारा मिलीभगत कर एक अपराधी को विदेश भगाने का मामला सामने आया। पुलिस पर आरोप है कि उसने जमानत पर आए जानलेवा हमले के आरोपित को पासपोर्ट वेरिफिकेशन में क्लीन चिट दे दी। इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया भाग गया। इससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि कोर्ट में पेशी के दौरान फरार आरोपी की बजाय कोई अन्य व्यक्ति आता रहा। कोर्ट में जब फर्जी पेशी की पोल खुली तो आरोपी के खिलाफ जगाधरी सिटी थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए। यहां भी पुलिस ने खेल करते हुए शुरूआत में आरोपी के खिलाफ पासपोर्ट एक्ट के उल्लंघन की धाराएं नहीं लगाईं।
अवैध वसूली में दो वर्ष कैद और जुर्माना
यूपी की धार्मिक नगरी वाराणसी में चार दिसंबर 2018 को एक सिपाही दीनानाथ को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) रामचंद्र की अदालत ने ट्रकों से अवैध वसूली करने के आरोप में दो वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगा है। आरोपी को बचाने के लिए थाने के मालेखाने में रखे गई रिश्वत की रकम गायब कर दी गई थी।
स्मिता भादुड़ी केस: अटल बिहारी ने दिए थे CBI जांच के आदेश
18 साल पहले वर्ष 2000 में मेरठ के दौराला थाना क्षेत्र के जंगल में बीएससी की छात्रा अपने सहपाठी के साथ कार में बैठी बात कर रही थी। उसकी कार को पुलिस ने घेर लिया। दोनों को बाहर आने के लिए कहा गया। पुलिस से डरकर लड़के ने कार को जंगल में दौड़ा दिया। सिपाहियों ने कार में बदमाश होने की सूचना वायरलेस पर फ्लैश करा दी। इन्स्पेक्टर दौराला अरुण शुक्ला ने मौके पर पहुंच कार पर गोलियां बरसा दीं। मौके पर छात्रा स्मिता भादुड़ी की मौत हो गई। पुलिस ने इसे एनकाउंटर का नाम दिया। मामले पर तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने दुख जताते इसे शर्मसार करने वाली घटना करार दिया था। मामले में उन्होंने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद इन्स्पेक्टर अरुण शुक्ला और दूसरे पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज हुई और सभी को जेल जाना पड़ा था।
गोपाल माहेश्वरी केस: दो इन्स्पेक्टर और चार एसओ गए सलाखों के पीछे
वर्ष 1996 में मेरठ का सबसे चर्चित मामला गोपाल माहेश्वरी एनकाउंटर था। एक सर्राफा संग मिलकर पुलिस ने गोपाल माहेश्वरी को मेडिकल क्षेत्र के सम्राट पैलेस में मार गिराने का दावा किया था। पुलिस ने दावा किया कि वह लालकुर्ती इलाके से स्कूटर लूटकर भाग रहा था। पुलिस ने उसके पास से एक स्कूटर और दुर्घटना में मरे एक सिपाही की गायब बदूंक को बरामद दिखाया। पुलिस ने कहा कि गोपाल ने सिपाही की हत्या कर बंदूक लूटी थी। सीबीआई जांच के बाद दो इंस्पेक्टर रामकेर सिंह, ओमपाल सिंह, तीन एसओ अविनाश मिश्रा, श्यामलाल कश्पयप, महेश चौहान, संजय त्यागी आदि कुल आठ को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
वकील सत्यपाल और सिपाही प्रवीण केस: एसओ को जाना पड़ा था जेल
सन 2006 में मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर में एक वकील के घर पर बदमाश के छिपे होने का दावा कर पुलिस ने दबिश दी। बदमाश तो नहीं मिला लेकिन वकील सतपाल मलिक को गोली मार दी गई और उनकी मौत हो गई। आरोप लगा कि वकील के मरने पर पुलिस ने अपने एक साथी सिपाही को भी मार डाला। इस मामले ने काफी तूल पकड़ा। दिल्ली से लखनऊ तक मामले की गूंज पहुंची। तब तत्कालीन एसओ मेडिकल राजेंद्र यादव समेत दूसरे पुलिसवालों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया।


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