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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले को राजनीतिक रंग देकर बचना चाहता था क्रिश्चियन मिशेल

नई दिल्ली । लंबी जद्दोजहद के बाद भारतीय जांच एजेंसियां देश के बहुचर्चित अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर घोटाले के आरोपी क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित करने में सफल हुई हैं। भारत सरकार के लिए जहां ये बड़ी उपलब्धि है, वहीं इस डील के बिचौलिए मिशेल के लिए ये एक तगड़ा झटका है। दरअसल मिशेल ने खुद को बचाने और प्रत्यर्पण रोकने के लिए पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया। उसने भारतीय जांच एजेंसी ED व CBI पर गंभीर आरोप लगाए।
मिशेल ने दुबई की सुप्रीम कोर्ट में कहा कि भारत में अगस्ता वेस्टलैंड मामले का राजनीतिकरण किया जा रहा है। उसे एक राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। भारत सरकार की जांच एजेंसी सीबीआइ उस पर दबाव बना रही है कि वह फर्जी तरीके से विपक्ष में बैठे यूपीए नेताओं का नाम ले। क्रिश्चियन को लग रहा था कि मामले का राजनीतिकरण करने से उसे प्रत्यर्पण से छूट मिल सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।
इतना ही नहीं ब्रिटिश मूल के मिशेल ने खुद के बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि वह दुबई में बिजनेस करता है। दुबई की सुप्रीम कोर्ट में भारतीय जांच एजेंसियों ने बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के खिलाफ इतने पुख्ता सुबुत रखे कि कोर्ट उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दुबई से भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। इससे पहले दुबई की निचली अदालत भी मिशेल की प्रत्यर्पण पर रोक संबंधी याचिका खारिज कर चुकी थी। मंगलवार को ही उसे दुबई से भारत लाया गया था।

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