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पैसा देने में बैंक ने की देरी, लाइन में खड़े-खड़े बीमार बुजुर्ग की मौत

कानपुर। हर भारतीय का बैंक होने का दंभ भरने वाले भारतीय स्टेट बैंक की कानपुर स्थित भीतरगांव शाखा में संवेदना का "सर्वर" इस कदर डाउन रहा कि गंभीर बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग ने चार घंटे तक बैंक की लाइन में लगने के बाद वहीं दम तोड़ दिया। बुजुर्ग को एलएलआर अस्पताल ने रविवार शाम संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) लखनऊ के लिए रेफर किया था।
सोमवार को लखनऊ जाने से पहले पिता बेटे के साथ पैसे निकालने बैंक गया था लेकिन बैंक प्रबंधन संवेदनहीन बनकर उन्हें टहलाता रहा। गुस्साए ग्रामीणों ने बैंक के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर शांत किया। बैंक प्रबंधक के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया गया है।
किडनी और लिवर की बीमारी से ग्रस्त भीतरगांव कस्बा के मजरा खदरी निवासी रामकिशन साहू (62) को उनके पुत्र शिवशंकर, उमाशंकर व जयशंकर ने आठ दिसंबर शनिवार को एलएलआर (हैलट) अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां से चिकित्सकों ने उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया।
बेटों के अनुसार पैसे खत्म होने पर वह पिता को गांव ले आए। लखनऊ जाने से पहले सोमवार को पैसा निकालने के लिए करीब 11.30 बजे पिता के साथ कस्बे की एसबीआई बैंक शाखा गए। 48 हजार रुपये का विड्राल फार्म भरकर दिया लेकिन सर्वर धीमा बताकर दो घंटे बाद नंबर पुकारा गया।
कैशियर ने खाते में कुछ रुपये कम बताए तो तत्काल एक हजार रुपये जमा कर दिए। फिर पिता की गंभीर हालत और पीजीआई जाने का वास्ता देकर शाखा प्रबंधक से जल्द भुगतान कराने का अनुरोध किया। इसके बाद मिलान न होने की बात कह दोबारा साइन कराने के लिए कहा। पिता का आधार, वोटर आईडी, राशन कार्ड समेत कई दस्तावेज दिखाए लेकिन प्रबंधक डॉक्टर से लिखवा कर लाने की बात कह टहलाते रहे। करीब साढ़े तीन बजे पिता की मौत हो गई। इस पर बैंक में खलबली मची। उन्हें आननफानन सीएचसी ले गए लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
एसबीआई के डीजीएम रामसुख सरोज ने बताया कि बुजुर्ग को गंभीर हालत में शाम चार बजे लाया गया था। अंगूठा लगाने के दौरान ही उनकी मौत हो गई। मृत्यु के बाद बिना प्रक्रिया पूरी किए भुगतान नहीं किया जा सकता है। यह बताने पर परिवार के लोग उग्र हो गए। चार घंटे इंतजार की बात गलत है।

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