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जब भारतीय नौसेना के हमले के बाद 7 दिनों तक सुलगता रहा था कराची नेवल बेस

नई दिल्‍ली । 3-4 दिसंबर का दिन भारत के इतिहास में बेहद खास है। खास इसलिए क्‍योंकि यही वो दिन है जब भारतीय नौसेना ने पाकिस्‍तान के शातिराना इरादों की धज्जियां उड़ाते हुए जीत हासिल की थी। यह समय ऐसा था जब बांग्‍लादेश के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर था। 25 नवंबर को पाकिस्‍तान में आपातकाल का ऐलान कर दिया गया। इसको देखते हुए भारत ने अपनी सुरक्षा को मजबूत करते हुए जंगी जहाजों और सबमरीन को पाकिस्‍तान के नेवल बेस पर नजर रखने और किसी भी बिगड़े हालात में तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार रखा था। ऐसे में हालात तब और बेकाबू हो गए जब पाकिस्‍तान की एयर फोर्स ने पश्चिम से सटे भारतीय इलाकों में बमबारी शुरू कर दी। इसके बाद भारतीय नेवी ने पाकिस्‍तान के खिलाफ चलाया था ऑपरेशन ट्राइडेंट।
शुरुआत में इस लड़ाई में भारतीय नौसेना को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस जंग में पाकिस्‍तानी सबमरीन हंगोर के हाथों भारतीय नौसेना के दो जंगी जहाज आईएनएस कृपाण और आईएनएस खुकरी नष्‍ट हो चुके थे। आईएनएस खुकरी के कप्‍तान महेंद्र नाथ मुल्ला ने अपने जहाज के साथ ही बिना किसी भय के जलसमाधि ले ली थी। बाद में उन्‍हें मरणोपरांत महावीर चक्र से भी नवाजा गया था।
इतना ही नहीं पाकिस्‍तान ने इस जंग में अपनी सबसे ताकतवार सबमरीन गाजी को मैदान में उतार दिया था। इस सबमरीन का मकसद दक्षिण में विशाखापट्टनम पर हमला कर उसपर कब्‍जा करने के साथ भारतीय विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को नष्‍ट करना था। लेकिन भारतीय नौसेना किसी भी हमले के लिए तैयार थी और उसके पास एक प्‍लान भी था। इस टास्क की जिम्मेदारी 25वीं स्क्वॉर्डन के कमांडर बबरू भान यादव को दी गई थी। 4 दिसंबर, 1971 को नौसेना ने कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना हेडक्वार्टर पर पहला हमला किया था। एम्‍यूनिशन सप्‍लाई शिप समेत कई जहाज नेस्‍तनाबूद कर दिए गए थे। इसमें पाकिस्‍तान के कई ऑयल टैंकर भी नष्‍ट कर दिए गए थे। इस युद्ध में पहली बार भारत ने एंटी शिप मिसाइल का इस्‍तेमाल किया था।
150 किमी दूर से बनाना था निशाना प्‍लान के तहत भारतीय नौसैनिक बेड़े को कराची से 250 किमी की दूरी पर तैनात किया गया था। अंधेरा होने पर बेड़े को आगे बढ़ना था और 150 किमी दूर तैनात होना था। इसकी वजह एक ये भी थी कि उस वक्‍त पाकिस्‍तान के पास रात में हमला करने वाले विमान नहीं थे। वहीं दिन में भारतीय सबमरीन का पता उनके राडार लगा सकते थे। प्‍लान के मुताबिक भारतीय नौसेना को कराची पर हमला कर हर हाल में रात में ही वापस आना था।
रात 9 बजे के करीब भारतीय नौसेना के आईएनएस निपट, आईएनएस निर्घट और आईएनएस वीर ने आगे बढ़ना शुरू किया। यह सभी मिसाइलों से लैस थे। रात 10:30 पर कराची बंदरगाह पर पहली मिसाइल दागी गई। 90 मिनट के भीतर पाकिस्तान के 4 नेवी शिप डूब गए। 2 बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कराची बंदरगाह आग की लपटों में घिर गया। कराची तेल डिपो में लगी आग की लपटों को 60 किलोमीटर की दूरी से भी देखा जा सकता था। कराची के तेल डिपो में लगी आग को सात दिनों और सात रातों तक नहीं बुझाया जा सका।
इसी बीच भारतीय राडार पर पाक सबमरीन गाजी के भारतीय जलक्षेत्र में घुसने की जानकारी मिली। पूर्वी नेवल कमांड के वाइस एडमिरल नीलकंत कृष्‍नन ने आईएनएस विक्रांत पर मंडराते खतरे को भांपते हुए उसको तुरंत अंडमान निकोबार रवाना कर दिया। इसकी जगह रिटायर हो चुके आईएनएस राजपूत को तैनात कर दिया गया। गाजी की जानकारी लगातार आर्इ्एनएस राजपूत के राडार पर दिखाई दे रही थी। इसको रोकने और इसका सामना करने के लिए भारतीय सबमरीन करंज (S-21) को भेजा गया था। करंज के साथ समस्‍या थी कि वह समुद्र की ज्‍यादा गहराई में नहीं जा सकती थी। इसके अलावा उसको एक नियत समय पर समुद्र की सतह पर आना ही होता था। लेकिन यह किसी खतरे से कम नहीं था।
गाजी को भारतीय सबमरीन की कमी का पूरा ज्ञान था। गाजी की तरफ से छोड़े गए टारपिडो ने भारतीय सबमरीन के पिछले हिस्‍से को काफी नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में सबमरीन अपनी लोकेशन में बदलाव करने में पूरी तरह से असमर्थ साबित हो रही थी। वहीं दूसरी तरफ गाजी लगातार टारपिडो से करंज पर हमला कर रही थी। लेकिन एक को छोड़ उसके बाकी हमले नाकामयाब साबित हो रहे थे। ऐसे में गाजी ने करंज को नष्‍ट करने के लिए उसके पीछे से हमला करने की योजना पर काम किया जो उसके लिए घातक साबित हुआ। भारतीय सबमरीन के पीछे आते ही वह करंज के निशाने पर आ गई और इसके कप्‍तान ने तुरंत टारपिडो से उसपर निशाना लगाकर उसकी समुद्र में ही कब्र खोद दी थी। इस लड़ाई में गाजी की कब्र खुदने के बाद भारत जीत हासिल कर चुका था।
पाक को जबरदस्‍त झटका
गाजी का जलमग्‍न होना पाकिस्‍तान के लिए जबरदस्‍त झटका था। हालांकि पाकिस्‍तान ने कभी नहीं माना कि आमने सामने की लड़ाई में गाजी समुद्र में समा गई और उसके जवान मारे गए। वह हमेशा गाजी के डूबने को तकनीकी खामी बताता रहा है। गाजी उस वक्‍त की अत्‍याधुनिक सबमरीन थी। यह पनडुब्‍बी पाकिस्‍तान ने 1963 में अमेरिका से लीज पर ली थी। इसके बाद 1964 में पाकिस्‍तान ने इसे खरीद लिया था। यह पनडुब्बी दुश्‍मन पर तेजी से सटीक हमला करने के लिए जानी जाती थी। इसमें टारपीडो के अलावा समुद्र में माइंस बिछाने की अदभुत क्षमता थी। सरकारी दस्‍तावेजों में भी इसी तरह का जिक्र किया भी गया है। 

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