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MP Election : पटैरिया ने दिया BJP से इस्तीफा, गौर-कृष्णा को दी गई समझाइश

भोपाल। टिकट वितरण को लेकर भाजपा में भभका असंतोष का लावा ठंडा पड़ने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष धीरज पटैरिया ने जबलपुर से टिकट न मिलने पर खफा होकर भाजपा से अपने सारे नाते ताेड लिए।
डेढ़ लाइन के इस्तीफे में पटैरिया ने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, संगठन महामंत्री सुहास भगत को सूचना दी है कि वे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। बताया जाता है कि वे कोलार क्षेत्र में अपने समर्थकों के साथ एक होटल में ठहरे हुए थे। वहां दूरभाष पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे संपर्क किया।
पटैरिया ने नवदुनिया से चर्चा में इस्तीफे की पुष्टि की है। वे जबलपुर उत्तर से राज्यमंत्री शरद जैन वाली सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। पटैरिया मूल रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं। बातचीत में उन्होंने कहा कि कई अन्य दल उनके संपर्क में हैं। ज्ञात हो कि अब तक विपिन दीक्षित ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें भाजयुमो अध्यक्ष बनने के बाद भी पार्टी ने चुनाव नहीं लड़ाया।
उधर, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और पूर्व महापौर कृष्णा गौर को समझाइश दी गई है। टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की धमकी देने वाले बाबूलाल गौर और कृष्णा गौर का रुख सोमवार को नरम पड़ गया। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी उन्हें ही प्रत्याशी बनाएगी।
हालांकि उनके रुख में आई नरमी को भी एक रणनीति माना जा रहा है। निर्दलीय तौर पर चुनाव लड़ने की बात प्रचारित होने से भोपाल से दिल्ली तक पार्टी सकते में आ गई। गौर को समझाइश दी गई। इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि जब तक गोविंदपुरा का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक गौर कैंप की ओर से कोई बयानबाजी नहीं होगी।
पीएम की बात पर भरोसे में आए गौर
गौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वाक्य के भरोसे टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं जो उन्होंने कार्यकर्ता महाकुंभ के दौरान गौर से हाथ मिलाते हुए कहे थे। ऐसा कहा जाता है कि प्रधानमंत्री ने ठहाके के साथ गौर से हाथ मिलाते हुए कहा था कि बाबूलाल गौर एकबार और। गौर तर्क देते हैं कि जब पीएम यह बात बोल गए तो टिकट उन्हें ही मिलना चाहिए। साथ में उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं उनके लिए चिंतित हैं।
इधर, भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी लाइन के बाहर जाकर चुनाव लड़ने की बात सार्वजनिक रूप से कहे जाने के कारण गौर के खिलाफ कार्रवाई की जाना चाहिए। पर्यटन निगम के अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि इससे कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जाता है। बगावत को ठंडा करने के लिए गौर और उनकी बहू से सीएम व अन्य लोगों ने बातचीत की है, जिसके बाद दोनों के रुख में नरमी आई है। केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान ने भी बाबूलाल गौर से इस मसले पर चर्चा की।
फर्जी सूची से बनी गफलत की स्थिति
नरेन्द्र सिंह तोमर एवं सहस्त्रबुद्धे के इंदौर से निकलते ही सोशल मीडिया पर इंदौर की सभी सात सीटों के उम्मीदवारों की एक सूची जारी हो गई, जिस पर बाकायदा संसदीय बोर्ड के सचिव जेपी नड्डा के दस्तखत भी थे। इस सूची में कैलाश विजयवर्गीय, उनके पुत्र आकाश समर्थक रमेश मेंदोला समेत सुदर्शन गुप्ता, मालिनी गौड़, राजेश सोनकर व जीतू जिराती के नाम भी थे। कुछ समय तक सोशल मीडिया की सनसनी बनी इस सूची को बाद में पार्टी ने फर्जी करार दिया।
देर रात सीएम हाउस पर हुई मंत्रणा
रात को मुख्यमंत्री निवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें पार्टी में उत्पन्न् हुए असंतोष एवं बचे हुए टिकटों को लेकर चर्चा हुई। इसमें इंदौर की सभी सीटें, भोपाल की गोविंदपुरा, सिवनी मालवा, पन्न्ा प्रमुख हैं। बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, संगठन महामंत्री रामलाल और प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे मुख्य रूप से मौजूद रहे। 
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