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CBI रार: SC से निराश होकर लौटे अश्विनी कुमार, याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार

नई दिल्ली । सीबीआइ की अंदरूनी घमासान का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसे लेकर सीबाआइ के एक और वरिष्ठ अधिकारी अश्विनी कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि शीर्ष न्यायालय से उन्हें निराशा हाथ लगी। दरअसल, कोर्ट ने सीबीआइ अधिकारी अश्विनी कुमार गुप्ता की इंटेलिजेंस ब्यूरो को वापस भेजने की चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। 
मनीष कुमार सिन्हा भी SC पहुंचे 
वहीं, सीबीआइ के डीआइजी मनीष कुमार सिन्हा ने भी अपने ट्रांसफर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। मनीष कुमार सिन्हा का ट्रांसफर नागपुर किया गया है। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआइ के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआइआर पर एसआइटी जांच की मांग की है।
अश्विनी कुमार गुप्ता ने याचिका में कहा
बता दें कि CBI के वरिष्ठ अधिकारी ने आरोप लगाया कि दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों से उन्हें आइबी में वापस भेजने का आदेश जारी किया गया है। कुमार ने शीर्ष अदालत को बताया कि उन्हें उनके मूल संगठन आइबी में इस आधार पर वापस भेजा जा रहा है कि सीबीआइ को उनकी सेवा विस्तार का आदेश प्राप्त नहीं हुआ, जबकि सेवा विस्तार से संबंधित आइबी का अनापत्ति-पत्र उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म होने से पहले ही जून में सीबीआइ को प्राप्त हो गया था। इसे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को मंजूरी के लिए अग्रसारित भी कर दिया गया था।
लिहाजा, उन्हें आइबी में वापस भेजने का 24 अक्टूबर का आदेश दुर्भावनापूर्ण और मामले की निष्पक्ष जांच में बाधा डालने के उद्देश्य से जारी किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस आदेश का मकसद एक ईमानदार अधिकारी को परेशान और दंडित करने का भी है। याचिका में उन्होंने सीबीआइ प्रमुख आलोक वर्मा के सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले में हस्तक्षेप करने की अनुमति भी मांगी है।
अश्विनी कुमार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीबीआइ में इस समय विभिन्न पुलिस संगठनों के कई अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर हैं, जो प्रतिनियुक्ति अवधि पूरी होने के बावजूद जांच एजेंसी में बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जांच एजेंसी से इसलिए बाहर किया जा रहा है क्योंकि राकेश अस्थाना के खिलाफ 30 अगस्त, 2017 को दर्ज स्टर्लिंग बायोटेक मामले की जांच में वह एके बस्सी की मदद कर रहे थे और जांच में मिले कई सबूतों की वजह से अस्थाना इस मामले में फंस रहे थे। इसी वजह से एके बस्सी को भी पोर्ट ब्लेयर स्थानांतरित करके परेशान और दंडित किया गया है।
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