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राजस्थान में छाया बाहरी और स्थानीय का मुद्दा, वसुंधरा राजे और सचिन पायलट निशाने पर

जयपुर । राजस्थान के विधानसभा चुनाव में इस बार स्थानीय और बाहरी का मुद्दा जोर पकड़ रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को कांग्रेस बाहरी बता रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट का जन्मस्थान और ननिहाल पूछ रही है। हालांकि, दोनों ही नेताओं ने इस मामले में काफी कड़ी प्रतिक्रियाएं भी दी हैं।

राजस्थान में इस बार के चुनाव में अभी तक कोई बड़ा मुद्दा सामने नहीं आया था, लेकिन अब स्थानीय और बाहरी का मुद्दा गरमा रहा है। इसका कारण यह है कि भाजपा का नेतृत्व कर रहीं राजे और पायलट दोनों ही मूलरूप से राजस्थान के नहीं हैं। राजे मूलत: मध्य प्रदेश से हैं और उनका विवाह धौलपुर राजघराने में हुआ है। वहीं, पायलट का मूल जन्मस्थान भी राजस्थान से बाहर है। हालांकि, उनके पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की राजनीतिक कर्मभूमि राजस्थान ही रही है और उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां रमा पायलट भी राजस्थान के दौसा से ही सांसद रही हैं।
दोनों नेताओं के जन्मस्थान बाहर होने के कारण ही इस बार स्थानीय और बाहरी का मुद्दा गरमा रहा है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पायलट हवाई नेता हैं, वे राजस्थान में कभी रहे नहीं। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने तो सोमवार को प्रेसवार्ता में यह तक कहा कि पायलट बताएं कि उनका जन्मस्थान और ननिहाल कहां है? उधर, कांग्रेस नेता भी राजे पर बाहरी होने का आरोप लगा चुके हैं।
दोनों नेताओं ने दी तीखी प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर दोनों ही नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई थी। राजे ने कहा था-जो लोग उन्हें बाहरी बता रहे हैं, उन्हें मैं कहना चाहती हूं कि यहां मेरी डोली आई थी और अब अर्थी ही जाएगी।' वहीं, पायलट ने कहा कि पिता की नौकरी ऐसी थी कि उनका जन्म राजस्थान से बाहर हुआ, वरना वह ढाई वर्ष की उम्र से राजस्थान से जुड़े हैं, जबकि राजे तो विवाह होने के बाद राजस्थान से जुड़ी हैं।
राजे झेल चुकी हैं बाहरी होने का मुद्दा
दोनों दलों के प्रमुख नेताओं पर बाहरी होने का मामला पहली बार ही सामने आया है। हालांकि, राजे 2003 में इस मुद्दे का सामना कर चुकी हैं। उस समय पार्टी ने भैरों सिंह शेखावत को दिल्ली बुलाकर राजे को यहां लॉन्च किया था। हालांकि, तब वह झालावाड़ से सांसद थीं, लेकिन कांग्रेस ने उस समय राजे के बाहरी होने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। तब कांग्रेस ने अशोक गहलोत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था और वह स्थानीय ही हैं। अलबत्ता, इस बार गहलोत के बजाय नेतृत्व पायलट का है।

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