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RBI के मामले में जानिए क्या है सेक्शन 7, आज तक नहीं हुआ है इसका इस्तेमाल

नई दिल्ली। सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के बीच जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच खबर यह आ रही है कि सरकार अब आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 को लगाने का चरम कदम उठा सकती है।
बताते चलें कि आरबीआई के 83 वर्षों के इतिहास में आज तक कभी भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऐक्ट, 1934 के सेक्शन 7 का इस्तेमाल नहीं किया। मगर, हाल में उभरी परिस्थितियां आगे भी कायम रहीं, तो मोदी सरकार पहली बार इसका सहारा लेने पर विचार कर सकती है।
क्या है सेक्शन 7
आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 के मुताबिक, सरकार के पास यह अधिकार होता है कि वह जनता के हित को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक को दिशानिर्देश जारी कर सकती है। रिजर्व बैंक उन निर्देशों को मानने के लिए बाध्य होगा। सरकार समय समय पर ऐसा आरबीआई गर्वनर के परामर्श पर कर सकती है।
इसके आगे सेक्शन 7 का सब सेक्शन कहता है कि इस तरह का आदेश बैंक के सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टोरेट को अधिक शक्तिशाली बना देगा और बैंकिंग से जुड़े सभी कामकाजों पर इसी का नियंत्रण होगा। इससे आदेश से पहले बोर्ड ऑफ डायरेक्टोरेट से अधिक अधिकार गवर्नर के पास माने जाते थे।
आरबीआई एक स्वतंत्र निकाय है और यह अपने फैसले खुद लेता है। हालांकि, कुछ मामलों में इसे सरकार की बात सुननी पड़ती है। यह प्रावधान आरबीआई एक्ट के सेक्शन 7 में शामिल किया गया है।
केंद्र सरकार लोक हित को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर आरबीआई के गवर्नर से मश्वरा करके बैंक को निर्देश दे सकती है। जाहिर तौर पर यह सेक्शन सरकार को शक्ति देता है कि वह लोक हित में केंद्रीय बैंक को निर्देश दे सके, अन्यथा आरबीआई सरकार के किसी आदेश का पालन नहीं करेगा।
कड़ा कदम क्यों माना जा रहा है
सेक्शन 7 को लागू करना कड़ा कदम माना जा रहा है। जब देश 1991 में डिफाल्ट होने की स्थिति में आ गया था तब भी इस धारा को लागू नहीं किया गया था। इसके साथ ही साल 2008 की वैश्विक मंदी के बाद भी इसे अमल में नहीं लाया गया था। हालांकि, अभी यह जानकारी नहीं है कि सेक्शन 7 कैसे काम करता है क्योंकि इसका अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। विश्लेषक इस कदम को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि इससे केंद्रीय बैंक की स्वायत्ता पर असर पड़ेगा।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के बयान के बाद सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच दरार बढ़ गई थी। इसके बाद से ही माना जा रहा है कि सरकार सेक्शन 7 को लागू कर सकती है। आचार्य ने लंबे समय में देश की वित्तीय स्थिरता के लिए केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता की बात कही थी।
वित्त मंत्री ने खुलकर बोला
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को खुलकर कहा था कि साल 2008 से 2014 के बीच बैंक अंधाधुंध कर्ज बांटते रहे और रिजर्व बैंक अनदेखी करता रहा। इसकी वजह से ही बैंकों के एनपीए में भारी बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्री जेटली जिस वक्त की बात कर रहे थे, उस दिनों उर्जित पटेल डिप्टी गवर्नर थे और उनके पास अहम जिम्मेदारियां थीं।
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