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अमृतसर हादसा : पंजाब में राजकीय शोक की घोषणा, घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे सिद्धू

अमृतसर। अमृतसर में जोड़ा फाटक के पास शुक्रवार को दशहरे पर हुए ट्रेन हादसे में 61 लोगों के मरने की खबर है वहीं यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। मरने वालों में ज्यादातर उत्तर प्रदेश व बिहार के निवासी हैं। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब रेल ट्रैक पर दौ सौ मीटर तक शव व घायल बिखरे पड़े थे। लोग अपनों को ढूंढते दिखे। कई शव इतने टुकड़ों में कट गए कि उन्हें समेटना नामुमकिन था।
इतने भीषण हादसे के बाद सरकार ने राजकीय शोक की घोषणा की है और इसके कारण राज्य के सभी स्कूल-कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। जिस कार्यक्रम को देखने के दौरान यह हादसा हुआ उसमें नवजोत कौर सिद्धू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं। नवजोत कौर पर हादसे के बाद मौके से चले जाने के आरोप लगे हैं। हालांकि, उनके पति और कांग्रेस नेता नवजोस सिद्धू ने इसे हादसा करार दिया है और अपील की है कि इस पर राजनीति ना की जाए।
सिद्धू हादसे के बाद शनिवार सुबह हादसे में घायल लोगों से मिलने के लिए गुरु नानक देव अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने घायलों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वाना दी। वहीं मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इस हादसे पर दुख जताया और कहा कि यह बड़ी लापरवाही थी लेकिन यह जानते बूझते नहीं किया गया। यह एक हादसा था और लोगों पर कुदरत का प्रकोप हुआ है।
कई ट्रेनें रद्द, कुछ हुई डाइवर्ट
हादसे के बाद इस ट्रैक पर से गुजरने वाली 8 ट्रेनों को रद्द किया गया है वहीं 5 ट्रेनों का रूट बदला गया है। इसके अलावा 10 ट्रेनों का रूट छोटा किया गया है।
रात 12 बजकर 40 मिनट पर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा जोड़ा फाटक रेल ट्रैक घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि रेलवे ट्रैक के पास हुए दशहरा आयोजन की अनुमति नहीं ली गई थी। पर्व में भीड़ उमड़ने की वजह से यह हादसा हुआ। ट्रेन की स्पीड ज्यादा होने के विषय पर उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उस मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर रेलवे के जीएम वी चौबे, चेयरमैन अश्वनी लोहानी व भाजपा नेताओं के साथ सिन्हा मुआयना करते हुए कहा कि दुर्घटना बहुत ही दुखद है। वहां से वह गुरुनानक देव अस्पताल गए, जहां उन्होंने घायलों का हाल जाना। मौके पर मौजूद लोगों ने रेल प्रशासन मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। जीएम चौबे ने कहा कि दशहरा पर्व की कोई जानकारी रेलवे के पास नहीं थी और न ही पता था कि ट्रैक पर इतने लोग मौजूद है। इसकी जांच की जाएगी।
पार्षद मदान के बेटे ने कहा, हमने ली थी अनुमति
निगम कमिश्नर सोनाली गिरी ने कहा कि आयोजन के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। वहीं, आयोजनकर्ता पार्षद विजय मदान के बेटे व कांग्रेसी नेता सौरभ मदान ने कहा कि उन्होंने समारोह की जानकारी डीसीपी और संबंधित थाने में दी थी। चेकिग के लिए पुलिस फोर्स आई थी और समारोह के वक्त एडीसीपी स्तर के अधिकारी हाजिर थे। कार्यक्रम धोबीघाट की चारदीवारी में बने हुए मैदान में ही चल रहा था, पर लोग लाइनों वाली साइड पर भी खड़े होकर देखने लगे। घटना दुखद है।
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