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यहां भी अमृतसर जैसे हादसे का डर, पटरी पर ही बैठ जाते हैं लोग

शाजापुर। पंजाब के अमृतसर में शुक्रवार को रावण दहन के दौरान कई लोगों के ट्रेन की चपेट में आने से हर कोई स्तब्ध है। ऐसे हादसों से शाजापुर जिले में भी सबक लेने की जरूरत है। कुछ जगह सुरक्षा की अधिक दरकार है।
- जिले में यह है स्थिति बेरछा में रेलवे ट्रैक से करीब 100 फीट की दूरी पर होता है रावण के पुतले का दहन। इस दौरान कई लोग पटरी पर ही बैठ जाते हैं। इसी समय दो-तीन ट्रेनों के गुजरने का समय भी रहता है।
- बोलाई रेलवे स्टेशन से चंद कदमों की दूरी पर प्रसिद्ध सिद्धवीर हनुमान मंदिर है। प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को 10 से 15 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। अधिकांश ट्रेन से ही आते-जाते हैं। इन दो दिनों में रेलवे स्टेशन परिसर यात्रियों की भीड़ से खचाखच भर जाता है। बावजूद यहां पर न तो रेलवे और न ही स्थानीय पुलिस या जिला प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कोई विशेष उपाय करता है।
- शाजापुर से गुजरे एबी रोड किनारे मां राजराजेश्वरी मंदिर है। यहां मार्च-अप्रैल में नवरात्र में 15 दिनी मेला लगता है। रात में आरती के दौरान भीड़ हाईवे तक पहुंच जाती है। मेले की भीड़ भी हमेशा ही रहती है।
- मक्सी में प्रत्येक शनिवार को हाईवे कि नारे ही हाट और पशु बाजार लगता है। ऐसे में जाम की स्थिति भी निर्मित होती है।
पनवाड़ी में शुक्रवार को साप्ताहिक बाजार हाईवे से कु छ मीटर दूर ही लगता है। सुनेरा, नैनावद में भी हाट के दौरान ऐसे ही हालात रहते हैं

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