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माल्या के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर बदलना फैसले की चूक : CBI

नई दिल्ली। सीबीआई ने कहा है कि विजय माल्या के खिलाफ 2015 के लुकआउट सर्कुलर में बदलाव करना फैसले की चूक थी। तब सीबीआई ने नोटिस को "हिरासत" से बदलकर उसके आवागमन के बारे में केवल सूचना देने का कर दिया था।
सीबीआई के मुताबिक, उस वक्त माल्या जांच में सहयोग कर रहा था और उसके खिलाफ कोई वारंट नहीं था। तीन साल बाद इस विवाद के फिर से सामने आने के बाद सीबीआई सूत्रों ने कहा कि पहला लुकआउट सर्कुलर (एलओसी) 12 अक्टूबर, 2015 को जारी किया गया था। माल्या तब विदेश में था।
माल्या के लौटने पर ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन (बीओआइ) ने एजेंसी से पूछा कि क्या उसको हिरासत में लिया जाना चाहिए जैसा कि एलओसी में कहा गया है? इस पर सीबीआई ने कहा कि उसे गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वह सांसद है और उसके खिलाफ कोई वारंट भी नहीं है। एजेंसी केवल माल्या के आवागमन के बारे में सूचना चाहती है।
सीबीआई ने नवंबर 2015 के आखिरी हफ्ते में माल्या के खिलाफ एक ताजा एलओसी जारी किया, जिसमें देशभर के हवाई अड्डा अधिकारियों से कहा गया कि वे माल्या के आवागमन के बारे में सूचना दें। इससे इस सर्कुलर ने उस पुराने सर्कुलर का स्थान ले लिया, जिसमें कहा गया था कि यदि शराब कारोबारी देश से जाने का प्रयास करे, तो उसे हिरासत में ले लिया जाए। सूत्रों ने कहा कि उस समय जांच भी शुरुआती चरण में थी और सीबीआई 9,000 करोड़ रुपये के लोन डिफॉल्टर मामले में आइडीबीआइ से दस्तावेज एकत्रित कर रही थी।
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