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पीड़ित फारूक अली ने ऐसे बयां किया बस्तर के नक्सलवाद का दर्द

बस्तर/ नई दिल्ली । शहरी नक्सलवाद पर मंगलवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में सेमिनार का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के बारे में बताया गया। फारूक अली जिनके भाई की नक्सलियों ने 2001 में गोली मार कर हत्या कर दी थी।
उन्होंने बस्तर के दर्द को उजागर किया। फारूक अली ने कहा कि बस्तर में कई मासूम जिंदगियां बसती हैं। जिनका किसी सरकार, पुलिस एवं सशस्त्र बलों से कोई संबंध नहीं होता है। यहां के लोग पढ़ना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएं चाहते हैं
छतीसगढ़ के रहने वाले पोडियाम पांडा 2009 से 2017 तक नक्सली रहे। उन्होंने मई 2017 में आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने बताया कि नक्सली आदिवासियों से साल में एक बार फसल कटाई के समय कमीशन लेते हैं। वह काफी पैसे इकट्ठा करते हैं और देश के खिलाफ इनका इस्तेमाल करते हैं।

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