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भारत के गगनयान मिशन में फ्रांस देगा लाइफ सपोर्ट और मेडिसिन की मदद

बेंगलुरु। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत और फ्रांस परस्पर सहयोग करेंगे। इसरो के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन "गगनयान" को लेकर दोनों देशों ने गुरुवार को एक करार पर हस्ताक्षर किया। इतना ही नहीं दोनों देशों ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए एक कार्यसमूह का गठन भी कर लिया है।
फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के अध्यक्ष जीन-यूवेस ली गाल ने यह जानकारी दी। उनके अनुसार, करार के तहत इसरो की पहुंच फ्रांसीसी स्पेस हास्पिटल की सुविधाओं तक हो जाएगी। सीएनईएस प्रमुख के मुताबिक, दोनों स्पेस एजेंसियों के विशेषज्ञ अंतरिक्ष यात्रियों के इस्तेमाल में आने वाली खास दवाइयां, उनके स्वास्थ्य की निगरानी, जीवन रक्षा प्रणाली, रेडिएशन से बचाव, अंतरिक्ष कचरा से हिफाजत व निजी साफ-सफाई प्रणाली विकसित करने को लेकर मिलजुल कर काम करेंगे।
उन्होंने बताया कि जिन स्थितियों में हम साथ मिलकर काम करने जा रहे हैं, उनको परिभाषित करने के लिए ही एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया है। गॉल ने कहा कि एमओयू के तहत पहले चरण में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जरूरी दवाओं पर शोध करने के लिए दोनों देशों के बीच विशेषज्ञों का आदान-प्रदान होगा।
हम अपने विशेषज्ञों जल्द भारत भेजने जा रहे हैं, ताकि वे पता लगा सकें कि साथ मिलकर हम क्या करने जा रहे हैं? हमारे पास फ्रांस में स्पेस हास्पिटल जैसी सुविधाएं हैं, इसलिए हमने इस पर सूचनाओं को साझा किया है।
मानव मिशन अभियान के दौरान इसरो अंतरिक्ष यात्रियों के जरिये माइक्रोग्रेविटी (सूक्ष्म गुरुत्व या भार हीनता) पर प्रयोग करना चाहता है। इस पर फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी प्रमुख का कहना है कि इंजीनियरिंग टीम ने इसको लेकर चर्चा भी शुरू कर दी है।
भारत के भावी अंतरिक्ष यात्रियों को ट्रेनिंग देने के लिए फ्रांस में टूलूज यूनिवर्सिटी हास्पिटल स्थित मेडेज स्पेस क्लीनिक या सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ माइक्रोग्रेविटी एप्लीकेशन एंड स्पेस ऑपरेशन (कैडमॉस) के बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग की नींव मार्च महीने में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के भारत दौरे के समय ही पड़ गई थी। उस समय दोनों देशों ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोग को लेकर संयुक्त दृष्टि पत्र जारी किया था।
इसरो प्रमुख डॉ. के शिवन के अनुसार, ज्वाइंट विजन स्टेटमेंट तो एक व्यापक करार था, जबकि गुरुवार को हस्ताक्षरित एमओयू मानव अंतरिक्ष मिशन तक ही केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद इसरो 2022 के पहले गगनयान के जरिये तीन अंतरिक्ष यात्रियों को हफ्ते भर के लिए स्पेस में भेजना चाहता है, जहां वे माइक्रोग्रेविटी को लेकर कई प्रयोग करेंगे।
बताते चलें कि भारत की साल 2022 से पहले अंतरिक्ष में तीन मनुष्यों को भेजने की योजना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का मिशन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत को दुनिया के चौथे देश के रूप में स्थापित कर देगा, जिसने कोई मानवयान अंतरिक्ष में भेजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर इसरो के पहले मानवयान मिशन की घोषणा की थी।
के शिवन ने कहा कि इसरो चाहता है कि दो साल में रुटीन लॉन्च विहिकल के प्रोडक्शन में उद्योग भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि स्पेस प्रोग्राम में उद्योगों की मौजूदा भागीदारी से वह खुश नहीं हैं। हमारा मिशन काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हम महीने में दो लॉन्च करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि वर्तमान में साल में करीब सात लॉन्च ही होते हैं।
अगले तीन सालों में 59 सैटेलाइट लॉन्च किए जाने हैं। इसरो को इसके लिए एक दर्जन से अधिक लाइट-लिफ्टिंग पीएसएलवी रॉकेट की जरुरत है। इसरो चाहता है कि इसके लिए इंडस्ट्री आगे आए और इसरो को इस भार से मुक्ति दे। इसरो की व्यावसायिक शाखा एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन के सीएमडी राकेश ससिभूषण ने कहा कि स्पेस इंडस्ट्री डबल डिजिट में ग्रोथ कर रही है।
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