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छत्तीसगढ़ में प्रस्ताव, सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स को मिले तीन लाख का वेतन

रायपुर। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने सरकारी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की भर्ती शुरू कर दी है। खास बात यह है कि सुपरस्पेशलिस्ट पदों पर पहली बार सीधी भर्ती हो रही है। असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन 1.50 लाख रुपये, जबकि प्रोफेसर को तीन लाख रुपये है। यह वेतन मेडिकल कॉलेजों में सेवारत प्रोफेसर से करीब एक लाख रुपये अधिक है।
मध्यप्रदेश सरकार ने भर्ती के नियम बनाए हैं, अब इन्हीं नियमों को लेकर छत्तीसगढ़ में भी हलचल तेज हो गई। सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की एक्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक हुई थी। स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर ने अध्यक्षता की, इस दौरान मध्यप्रदेश का सुपरस्पेशलिटी भर्ती नियम उनके समक्ष रखा गया। वेतनमान के दस्तावेज भी दिखाए गए।
जिस पर मंत्री ने स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारिक को निर्देशित किया कि वे इससे संबंधित प्रस्ताव तैयार करें। ये प्रस्ताव प्रदेश के सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के लिए बड़ा तौफा होगा। क्योंकि सरकारी अस्पतालों में इन्हें 60 से 80 हजार रुपये ही मिलते हैं। कुछ दिन ये काम करते हैं, जब हाथ जम जाता है तो निजी अस्पतालों का रुख कर लेते हैं। निजी अस्पताल इन्हें दो से तीन लाख के पैकेज में रख लेते हैं।
कम वेतन की वजह से सरकारी अस्पतालों में सुपरस्पेशलिस्ट नहीं टिकते, मध्यप्रदेश में भी यही संकट था, जिसे नए भर्ती नियम से दूर किया जा रहा है। गौरतलब है कि सितंबर अंतः या अक्टूबर के पहले हफ्ते में दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) हॉस्पिटल सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल का उद्घाटन होगा।
यहां 12 सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर्स हैं, और चाहिए। अगर अच्छा पैकेज उन्हें आकर्षित करेगा। यहां यह भी बता दें कि एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में यह भी सहमति बनी की दो-तीन लाख के पैकेज पर कोई प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करेगा।
डॉक्टर्स नहीं कर पाएंगे प्राइवेट प्रैक्टिस
छत्तीसगढ़ सरकार के नियमानुसार अगर कोई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करता है तो उसे नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) नहीं मिलता है। डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस इसलिए कहते हैं क्योंकि सरकारी वेतनमान काफी कम है,वे एनपीए नहीं लेते।
प्रदेश के 100 में 90 सरकारी डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस के चलते ये सरकारी ड्यूटी जिम्मेदारी से नहीं निभा पाते। तय समय के पहले अस्पताल से चले जाते हैं, मरीजों के प्रति पूरी जिम्मेदारी नहीं निभाते। इसके विपरीत एम्स में डॉक्टर्स का वेतन राज्य के मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स की तुलना में दो से ढ़ाई गुना तक है। वहां निजी प्रैक्टिस प्रतिबंधित है।
वर्तमान में सुपरस्पेशलिस्ट का वेतनमान
पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर का वेतन 1.75 लाख से दो लाख के बीच है। सुपरस्पेशलिस्ट प्रोफेसर का वेतन इनसे एक लाख रुपये अधिक होगा।
एमपी ने जारी किया भर्ती विज्ञापन के अनुसार
मध्यप्रदेश चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने जबलपुर, ग्वालियर, रीवा शासकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया है। इस विज्ञापन के तहत आवेदन की अंतिम तारीख पांच सितंबर है। आवेदन के अनुसार-
पद- वेतन
अधीक्षक- तीन लाख रुपये
प्रोफेसर- तीन लाख रुपये
एसोसिएट प्रोफेसर- 2.50 लाख रुपये
असिस्टेंट प्रोफेसर- 1.50 लाख रुपये
सुपरस्पेशलिस्ट को अच्छा वेतन मिलना चाहिए
जिस तरह से मध्यप्रदेश ने सुपरस्पेशलिस्ट का वेतन तय किया है,यह अच्छा कदम है। सरकारी अस्पतालों में सुपरस्पेशलिस्ट नहीं मिल रहा, क्योंकि उनकी पढ़ाई के अनुरूप वेतन नहीं है। राज्य में भी इन्हें अच्छा वेतन होना चाहिए। लेकिन मेरा यह भी कहना है कि नीचे के पदों का वेतनमान भी रिवाइज करने की जरूरत है। - डॉ. मानिक चटर्जी, अध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिशन
अच्छे वेतन से डॉक्टर्स आकर्षित होंगे
सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर्स सरकारी अस्पताल में सेवा दे रहे हैं, अगर और अच्छा वेतन मिले तो और डॉक्टर्स आकर्षित होंगे। (मध्यप्रदेश सरकार ने तो सुपरस्पेशलिटी भर्ती नियम बना लिए हैं, बोले...) यह अच्छी पहल है। - डॉ. पुनीत गुप्ता, अधीक्षक, डीकेएस सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल
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