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आसाराम की राजदार शिल्पी की जमानत को चुनौती देगा पीड़िता का परिवार

शाहजहांपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की सह-अभियुक्त शिल्पी उर्फ संचिता को शनिवार को राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से जमानत दिए जाने से पीड़िता के परिवार को झटका लगा है। उन्होंने इस फैसले को चुनौती देने की बात कही है।
पीड़िता के पिता का कहना है कि उनके पास पर्याप्त गवाह व साक्ष्य हैं, जिनके आधार पर वह कथावाचक आसाराम या उसके किसी भी साथी को जेल से बाहर नहीं आने देंगे। आसाराम का पिछले दिनों ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कह रहा था कि पहले शिल्पी को जेल से बाहर निकालूंगा फिर शिवा को। उसके बाद स्वयं जेल से बाहर आऊंगा।
उस समय पीड़िता के पिता ने इस ऑडियो क्लिप के आधार पर गड़बड़ी की आशंका जताई थी। उसके पिता ने जागरण से बातचीत में कहा कि कोर्ट ने शिल्पी को सिर्फ जमानत दी है। उसे दोष मुक्त करार नहीं दिया है। वह मोबाइल जिससे शिल्पी की आसाराम से बात होती थी पुलिस उसे बरामद नहीं कर पाई।
इसके आधार पर कोर्ट ने माना कि इस मामले में साक्ष्यों की कमी है। हालांकि, पीड़ित परिवार ने कहा कि उनके पास अभी गवाह हैं। अगली सुनवाई में इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। बिटिया के पिता ने कहा कि आसाराम की मंशा है कि जेल से बाहर आ जाए, लेकिन अपनी आखिरी सांस तक वह उसे सफल नहीं होने देंगे।
शिल्पी थी छिदवाड़ा के गुरुकुल की वार्डन
आसाराम की सेवादार व मध्य प्रदेश के छिदवाड़ा स्थित गुरुकुल की वार्डन शिल्पी थी। बिटिया पर ऊपरी हवा का चक्कर शिल्पी ने ही बताया था। उसी ने बिटिया व उसके परिजनों का ब्रेनवॉश कर आसाराम के आश्रम पर जाकर इलाज कराने को राजी किया था। वहीं, दूसरा आरोपित शिवा उन लोगों को आश्रम तक पहुंचाने में अहम कड़ी रहा था। दोनों को आसाराम के साथ साजिश में शामिल मानते हुए मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था।
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