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एक साल में 50 से अधिक मामलों में दहेज प्रताड़ना की झूठी शिकायतें हुईं

भोपाल। महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून का भी दुरुपयोग हो रहा है। पिछले एक साल में बहुओं ने सास-ससुर और जेठ के खिलाफ थानों में दहेज प्रताड़ना की 50 से अधिक झूठी शिकायतें दर्ज कराईं। यह खुलासा परिवार कल्याण समिति द्वारा की गई जांच में सामने आया है। इन मामलों में आरोपित ससुराल पक्ष वालों को समिति की सिफारिश पर बरी कर दिया गया।
बता दें कि ससुराल पक्ष के खिलाफ थानों में दर्ज मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के निर्देशानुसार बनी परिवार कल्याण समिति द्वारा की जाती है। अप्रैल में गठित समिति के पास अगस्त 2018 के बीच 100 से अधिक शिकायतें पहुंची। समिति का कहना है कि महिलाएं छोटे-छाटे मामलों में ससुराल वालों पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज करा देती हैं। जांच-पड़ताल का इन्हें खारिज कर दिया जाता है। इस तरह सास-ससुर और जेठ के खिलाफ दहेज प्रताड़ना को लेकर 50 झूठी पाई गईं।
छोटी बहू ने दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया
अयोध्या नगर निवासी शंकुतला साहू (काल्पनिक नाम) और उनके पति सरकारी नौकरी में हैं। वे आर्थिक रूप से संपन्न हैं। 2016 में उनके छोटे बेटे की शादी एक गरीब परिवार की लड़की से की, लेकिन शादी के करीब 6 महीने बाद बेटे ने बताया कि बहू उसके पीछे घर में अपने प्रेमी को बुलाती है। जब उसने मना किया तो बहू लड़कर मायके चली गई और बेटे सहित सास-ससुर के खिलाफ दहेज की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करा दी। समिति ने जांच की और ससुराल वालों को बरी किया।
मकान में हिस्सा पाने के लिए दर्ज कराया मामला
कोलार निवासी निर्मल सिंह और सविता (काल्पनिक नाम) की शादी नवंबर 2016 को हुई थी। विवाह के बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। इस पर पत्नी ने पति सहित सास, ससुर और ननद के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने का मामला दर्ज करा दिया। परिवार कल्याण समिति की जांच में खुलासा हुआ कि पीड़िता ने ससुराल के मकान में हिस्सा पाने के लिए गुस्से में शिकायत दर्ज करादी थी। समिति ने इस मामले में काउंसलिंग की जिसके बाद पीड़िता ने अपनी शिकायत वापस ले ली।
परिवार न टूटे
यह समिति सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार बनी है। हमारा प्रयास रहता है कि घर और परिवार न टूटे। लेकिन दहेज प्रताड़ना के कई मामले झूठे भी होते हैं। जांच कर बेकसूर ससुराल पक्ष को बरी किया जाता है और कई मामलों में केस दर्ज भी कराया जाता है - रीता तुली, वरिष्ठ काउंसलर, परिवार कल्याण समिति
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