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RTI की निजता धारा बदली तो भ्रष्ट अफसरों की चांदी : सूचना आयुक्त

नई दिल्ली। सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलू श्री कृष्ण आयोग के इस सुझाव पर भड़के हुए हैं कि आरटीआइ कानून की निजता धारा में बदलाव कर दिया जाए।
उनका कहना है कि सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून की निजता धारा में अगर किसी भी किस्म का बदलाव किया गया तो इससे भ्रष्ट अफसरों की चांदी हो जाएगी।
इसके चलते वे किसी भी तरह की जांच से साफ बच जाएंगे। इसको लेकर आचार्युलू ने मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर सहित अपने सभी समकक्ष सूचना आयुक्तों को पत्र लिखा है।
इसमें उन्होंने निजी डाटा सुरक्षा बिल में प्रस्तावित बदलाव के सुझावों को गैरजरूरी करार दिया है। कहा है कि यदि श्री कृष्ण आयोग के सुझाव को मानते हुए आरटीआइ कानून की निजता धारा में बदलाव कर दिया गया तो इससे
सूचना का अधिकार खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने ने सभी सूचना आयुक्तों से इस सुझाव का विरोध करने का आग्रह किया है ताकि आरटीआइ को बचाया जा सके।
बकौल आचार्युलू, "आरटीआइ कानून के प्रावधानों में किसी भी तरह के बदलाव के प्रस्ताव को व्यापक चर्चा के बगैर नहीं स्वीकार किया जा सकता है। इस पर आम जनता खासकर सूचना आयुक्तों से विचार-विमर्श जरूरी है।"
ध्यान रहे कि सरकार द्वारा गठित श्री कृष्ण आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही निजी डाटा सुरक्षा बिल का मसौदा तैयार किया गया है।
इस बिल के मसौदे में निजता से संबंधित आरटीआइ कानून की धारा 8(1)(जे) में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।
इस धारा के तहत किसी से संबंधित निजी जानकारी को उजागर करने से कुछ शर्तों के साथ छूट मिली हुई है। इस पर सूचना आयुक्त आचार्युलू का कहना है, "धारा 8(1)(जे) को बदलना कतई जरूरी नहीं है।
यह धारा सरकारी कर्मचारियों के निजता अधिकार और जनहित के बीच पर्याप्त संतुलन कायम करती है। इसलिए आरटीआइ में दखलंदाजी करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया जाना चाहिए।"
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