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MP-CG में इन दो दलों के बीच हुआ गठबंधन, मिलकर लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

रायपुर। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कल तक कांग्रेस के अलावा किसी और से गठबंधन न करने का दम भर रहे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम अब समाजवादी पार्टी (सपा) से हाथ मिलाने को तैयार हो गए हैं। मंगलवार को लखनऊ में गोंगपा के सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले।
दोनों के बीच हुई आधे घंटे की चर्चा में गठबंधन की सहमति बन गई है, हालांकि अभी सीटों के बंटवारे पर कोई बात नहीं हो पाई है। गोंगपा के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम ने नईदुनिया से कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ ही मध्यप्रदेश में भी हम सपा के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।
उन्होंने बताया, गोंगपा की बातचीत बहुजन समाज पार्टी से भी चल रही है। एक सप्ताह में बसपा से समझौते की उम्मीद है। सब ठीक रहा तो छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सपा, बसपा और गोंगपा मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में हुई बैठक में सपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी तिलक यादव, छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तनवीर अहमद, मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष गौरी यादव व गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के महासचिव श्याम सिंह मरकाम भी मौजूद रहे।
सपा की बसपा से चल रही बात
इस बैठक में यह तय हो गया कि दोनों दल एक साथ चुनाव लड़ेंगे। सपा की बसपा से भी बातचीत चल रही है। 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के बीच महागठबंधन को लेकर भी चर्चा जारी है। ऐसे में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी बसपा से भी समझौते की उम्मीद कर रही है।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम पहले पाली तानाखार सीट से विधायक रह चुके हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद उनकी पार्टी को कोई सफलता नहीं मिल पाई। पाली तानाखार सीट पर पार्टी का निश्चित वोट बैंक अब भी बरकरार है। इसके अलावा आसपास की दस अन्य सीटों पर भी पार्टी को कुछ वोट मिलते रहे हैं। मध्यप्रदेश की आधा दर्जन सीटों पर भी पार्टी का प्रभाव है
छत्तीसगढ़ में पहली बार ताकत झोंकने की तैयारी में सपा 
समाजवादी पार्टी इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में प्रत्याशी खड़ा करती रही है लेकिन कभी किसी भी सीट पर कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाई। इस बार पार्टी अपना खाता खोलने की उम्मीद लगा रही है। अखिलेश यादव छत्तीसगढ़ के नेताओं से कई दौर की चर्चा कर चुके हैं।
पिछले महीने ही उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष तनवीर अहमद को लखनऊ बुलाया था और छत्तीसगढ़ में चुनावी संभावनाओं पर बात की थी। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और बसपा से गठबंधन होने की स्थिति में पार्टी छत्तीसगढ़ में भी सीटों की हिस्सेदारी की मांग कर सकती है।
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे के तुरंत बाद अखिलेश ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्षों को चर्चा के लिए बुलाया। इस बार सपा कुछ सीटों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
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