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एनआरसी के पक्ष में खुलकर उतरी कांग्रेस

नई दिल्ली। असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर भाजपा के सियासी लाभ लेने का दांव थामने के लिए कांग्रेस खुलकर इसके पक्ष में आ गई है। अब तक एनआरसी पर सवाल उठा रही पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इसका समर्थन करती है।
कांग्रेस कार्यसमिति ने स्पष्ट कहा है कि एनआरसी का मकसद असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों का पता लगाना है। पार्टी ने एनआरसी का श्रेय लेने से भी गुरेज नहीं किया। इसने दावा किया कि नागरिकता रजिस्टर का 80 फीसद काम तो कांग्रेस सरकार ने ही कर दिया था।
कांग्रेस कार्यसमिति की शनिवार को हुई बैठक में व्यापक विचार-विमर्श के बाद पार्टी ने एनआरसी पर अपना यह स्पष्ट नजरिया जाहिर किया। राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एनआरसी पर पार्टी का दृष्टिकोण तय करने के लिए खासतौर पर असम के प्रमुख नेताओं को भी बुलाया गया था।
शीर्ष नीति निर्धारण समिति में मंत्रणा के बाद कांग्रेस ने साफ कहा कि एनआरसी असम समझौते का शिशु है। इस समझौते को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मूर्त रूप दिया था। पार्टी मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सुरजेवाला ने बैठक के बाद कहा कि कांग्रेस असम समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है।
एनआरसी से बाहर रह गए लोगों के बारे में कांग्रेस कार्यसमिति का कहना था कि हर भारतीय चाहे वह किसी भी पंथ, जाति और धर्म का हो उसे नागरिकता साबित करने का न्यायसंगत मौका मिलना चाहिए। पार्टी ने कहा कि अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान जरूरी है।
कार्यसमिति में असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने 1985 के असम समझौते से लेकर एनआरसी के मसौदे तक के सामाजिक-राजनीतिक पहलुओं का ब्योरा दिया। सूत्रों का कहना है कि सीधे तौर पर भले ममता बनर्जी का नाम नहीं लिया गया मगर आम राय यही थी कि एनआरसी बेहद संवेदनशील सियासी मसला बन गया है।
ऐसे में कांग्रेस की ओर से किसी रूप में विरोध का संदेश नहीं जाना चाहिए। यह राय भी जाहिर की गई कि भाजपा अगले चुनाव के मद्देनजर एनआरसी को सियासी ध्रुवीकरण के लिए हथियार बनाने की कोशिश करेगी। कांग्र्रेस को इस पर सतर्क रहना होगा।
मोदी सरकार को घेरा एनआरसी पर
भाजपा की सियासी आक्रामकता से कांग्रेस चिंतित दिख रही है। इसका संकेत सुरजेवाला ने यह कहते हुए दिया भी कि मोदी सरकार की विफलता से ध्यान हटाने के लिए भाजपा एनआरसी का ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल कर रही है। हमने घुसपैठियों को भेजा विदेशियों को वापस भेजने के भाजपा के दावे के बारे में पूछे जाने पर सुरजेवाला ने कहा कि चार साल में तो भाजपा ने महज 1,822 अवैध घुसपैठियों को वापस भेजा है। कांग्रेस सरकार ने 2005-13 के आठ साल में 82,728 घुसपैठियों को वापस भेजा।
अलग-थलग पड़ीं ममता
एनआरसी पर कांग्रेस के बदले रुख से साफ है कि इसको सियासी मुद्दा बना रही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी लगभग अलग-थलग पड़ गई हैं। भाजपा के एनआरसी पर सियासी इरादों को देखते हुए ही कांग्रेस ने ममता को सीधे विरोध से बचने की सलाह दी थी। मगर तृणमूल प्रमुख पश्चिम बंगाल की सियासत के मद्देनजर इस पर आक्रामक बनी रहीं। उन्होंने इसके चलते गृह युद्ध होने तक की चेतावनी दे डाली।
कांग्रेस ने इस तरह लिया यूटर्न पहले यह कहा
असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जारी होने के बाद विपक्षी पार्टी ने उस पर सवाल उठाया था। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने 30 जुलाई को फेसबुक पर कहा था कि बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं हो पाया है। इससे लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
सरकार ने 1,200 करोड़ रुपये से अधिक इस प्रक्रिया पर खर्च कर दिए हैं, मगर इसका कार्यान्वयन मंथर गति से हुआ है। उसी दिन कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि राज्य के मूल निवासियों से सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे राज्य में जाति और नस्ल के आधार पर विभाजन पैदा हो रहा है।
अब यह कहा
शनिवार को कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस एनआरसी का श्रेय लेने से भी नहीं चूकी। रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एनआरसी का पूरा फ्रेमवर्क तैयार कर सभी हितधारकों को शामिल करते इस प्रक्रिया की शुरुआत 2005 में असम की कांग्रेस और केंद्र की संप्रग सरकार ने की। इसके लिए 2009 में केंद्र ने करीब 490 करोड़ रुपये जारी करते हुए 25 हजार गणना करने वालों को नियुक्त किया था।
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