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खराब मौसम भी नहीं रोक पाएगा डुमना एयरपोर्ट में विमानों की लैंडिंग

जबलपुर। बारिश के दौरान आसमान पर घने बादल छाए रहने या ठंड के सीजन में घने कोहरे की चादर बिछी होने पर भी डुमना एयरपोर्ट खुला रहेगा।
यानी खराब मौसम होने पर भी डुमना में विमानों की लैंडिंग, टेक ऑफ का सिलसिला जारी रहेगा। क्योंकि एयरपोर्ट का डॉप्लर वैरी हाई फ्रिक्वेंसी ओमनी रेंज (डीवीओआर) बदलकर अब मोपिंस (कनाडा) से नया डीवीओआर व डिफरेंस मेजरिंग इक्युपमेंट (डीएमई) मंगाकर लगाने का काम शुरू हो गया है।
डुमना एयरपोर्ट को अपग्रेड करने का काम शुरू हो गया है। इसमें सबसे पहले पूरा होने वाला काम पुराना डीवीओआर हटाकर यहां नया आधुनिक डीवीओआर व डीएमई लगाया जा रहा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के निर्देश पर करीब 3 करोड़ की लागत से यह काम कराया जा रहा है। इसमें डुमना में स्थापित होने वाले इस आधुनिक उपकरण की लाइफ 12 साल है। डुमना में कनाडियन डीवीओआर व डीएमई की स्थापना का काम दिल्ली से आए 20 से अधिक कुशल श्रमिक, इंजीनियर कर रहे हैं। इस दल ने 15 सितंबर से पहले यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
क्या है डीवीओआर
डीवीओआर एक जमीन आधारित रेडियो नेविगेशन उपकरण है, जिसका आसमान पर हजारों मीटर की ऊंचाई पर उड़ते विमान के पायलट को मार्गदर्शन देने में उपयोग होता है। इस उपकरण में हवाई यातायात को नियंत्रित करने की क्षमता होती है।
आईसीएओ से प्रमाणित
अंतर राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) ने डीवीओआर को हवाई यातायात नियंत्रित करने में सक्षमता का प्रमाण-पत्र जारी किया है। यह उपकरण विमानों की लैंडिंग, टेकऑफ को आसान बनाने के साथ ही हवाई यात्रियों को सुरक्षा देता है।
अभी यह स्थिति
मना में रनवे की विजिबिलिटी कम से कम 5,000 मीटर और उससे ज्यादा होने पर ही विमानों की आवाजाही होती है। इससे कम विजिबिलिटी (दृष्यता) होने पर एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (एटीसी) खराब मौसम होने से विमानों को लैंड करने की अनुमति नहीं देता। नतीजा बारिश, ठंड के सीजन में जबलपुर तक आने वाले कुछ विमान डुमना के चक्कर काटकर ही लौट जाते हैं।
फिर होगा यह
कनाडियन डीवीओआर और डीएमई (दूरी मापने का उपकरण) के कार्य करने की स्थिति में डुमना के रनवे की विजिबिलिटी 2,500 मीटर होने पर भी विमान सुरक्षित लैंडिंग व टेक ऑफ कर सकेंगे। डुमना में आधुनिक डीवीओआर व डीएमई की स्थापना के बाद आकाश में 30 से 35 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते विमान के पायलट को भी हवाईरूट, एयरपोर्ट का मार्गदर्शन दिया जा सकेगा।
इस तरह आएगा अंतर
उपकरण मौजूदा स्थिति अब
1. डीवीओआर करीब 18 साल पुराना पंरपरागत नई तकनीक का 12 साल तक करेगा काम
2. पायलट को संकेत 15-20 हजार मीटर की ऊंचाई तक 30-35 हजार मीटर की ऊंचाई तक
3. विमान की लैंडिंग विजिबिलिटी 5,000 मीटर होना जरूरी विजिबिलिटी 2,500 मीटर पर भी होगी
4. डीएमई उपकरण ही नहीं हवा में उड़ते विमान को एयरपोर्ट से दूरी बताएगा।
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