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भोपाल में महात्मा गांधी ने की थी 'राम राज्य की व्याख्या'

भोपाल। भारत की आजादी की अलख जागने के लिए देश भ्रमण के दौरान महात्मा गांधी मध्य प्रदेश में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, देवरी, इटारसी, बैतूल, मुलताई, सागर, दमोह जैसे शहरों में पहुंचे। 89 साल पहले जब वे भोपाल आए तो बेनजीर ग्राउंड पर उनकी सभा हुई, जिसमें उन्होंने राम-राज्य व्यवस्था पर लंबा भाषण दिया था।
महात्मा गांधी 10 सितंबर 1929 में भोपाल आए थे। प्रो. आफाक अहमद की पुस्तक 'मध्यप्रदेश में गांधी" में इसका जिक्र है। इसमें बताया गया है कि गांधीजी तब तीन दिन भोपाल में रहे थे और उस दौरान वे राहत मंजिल में ठहरे थे। बाद में इसे गिराकर अहमदाबाद पैलेस बनाया गया है।
तीन दिन में उनकी केवल बेनजीर ग्राउंड में एक सभा हुई थी। उस समय गांधीजी ने कहा था कि 'रामराज्य का मतलब हिंदू राज्य कतई नहीं है।" उन्होंने कहा था कि मुसलमान भाई रामराज्य का अर्थ गलत न समझें। रामराज्य से मतलब है, ईश्वर का राज। मेरे लिए राम और रहीम में कोई अंतर नहीं है। मेरे लिए तो सत्य और सतकार्य ही ईश्वर है।
पता नहीं, जिस रामराज्य की कल्पना हमें सुनने को मिलती है, वह कभी इस पृथ्वी पर था भी या नहीं, लेकिन प्राचीन रामराज्य का आदर्श प्रजातंत्र के आदर्शों से बहुत कुछ मिलता-जुलता है और कहा गया है कि रामराज्य में दरिद्र से दरिद्र व्यक्ति भी कम खर्च में और अल्पअवधि में न्याय प्राप्त कर सकता था। प्रो. आफाक ने लिखा है कि गांधी ने नवाब हमीदुल्ला खां की तुलना हजरत उमर से की थी। हजरत उमर मोहम्मद साहब के प्रमुख चार साथियों में से एक थे।
इंदौर में बनी थी हिंदी राष्ट्रभाषा की कमेटी
गांधीजी ने इंदौर में 1918 में आठवें अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी, जिसमें भारत के आजाद होने पर हिंदी के राष्ट्रभाषा होने की घोषणा उन्होंने की थी। इसके लिए उन्होंने काका कालेलकर की अध्यक्षता व पुत्र देवदास गांधी की कमेटी बनाई थी। गांधीजी 1928 में छिंदवाड़ा भी आए थे। उन्हें वहां अली बंधु ने बुलाया था। गांधीजी के वर्धा आश्रम में बुंदेलखंड के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. गोपाल कृष्ण आजाद लंबे समय तक रहे।
इन परिवारों के यहां भी पहुंचे
गांधीजी मप्र यात्राओं के दौरान कुछ लोगों के घर भी ठहरे, जिनमें से कुछ नामों की सूची पिछले दिनों स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन ने तैयार की थी। इनमें बैतूल जिले के दीपचंद गोठी, ब्योहार राजेंद्र सिंह, सेठ लक्ष्मीचंद, केएम धर्माधिकारी, शंकर धर्माधिकारी, बिहारीलाल पटेल, मिस मैरी, रामदयाल खंडेलवाल व रामनाथ सुमन, इटारसी के मनकी बाई, मोहकमा सिंह, हीरालाल चौधरी व सैयद अहमद, सागर के रामकृष्ण राय, श्रीमती मुखर्जी व डॉ. सप्रे, देवरी के लाला भवानी प्रसाद, दशरथ लाल, परमानंद सिंघई, राजाराम पांडे, डॉ. राधाचरण चौबे, जमनाप्रसाद मिश्र, पं. लक्ष्मण राव जैसे नाम शामिल हैं।
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