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स्मार्टफोन के सहारे बंजरंग ने जीता गोल्ड

जकार्ता। भारतीय स्टार पहलवान बजरंग पूनिया ने देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए रविवार को 18वें एशियन गेम्स में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। सुपर स्टार पहलवान सुशील कुमार सभी को निराश करते हुए क्वालीफिकेशन राउंड में ही हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गए, जबकि अपूर्वी चंदेला और रवि कुमार की जोड़ी ने 10 मीटर एयर राइफल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर कर टूर्नामेंट में भारत के पदकों का खाता खोला था।
बजरंग ने 65 किग्रा फ्री स्टाइल में जापान के पहलवान ताकातानी दाइचि को 11-8 से हराते हुए स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले बजरंग ने 2014 में हुए एशियन गेम्स में रजत पदक जीता था और वह इस बार अपने पदक का रंग बदलने में कामयाब रहे। सेमीफाइनल मुकाबले में बजरंग ने मंगोलिया के बाटमगनाई बैटचुलुन को 10-0 से मात देकर फाइनल में प्रवेश किया।
तकनीकी दक्षता के आधार पर उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया। पूनिया ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ताजिकिस्तान के फेजेव अब्दुलकासिम को 12-2 से मात दी। बजरंग ने प्री-क्वार्टर फाइनल में उज्बेकिस्तान के पहलवान सिरोजिद्दीन खासानोव को 13-3 से हराया।
बजरंग के इस जोशिले प्रदर्शन के पीछे उनके स्मार्टफोन की अहम भूमिका रही है। वो अपने स्मार्टफोन के साथ घंटों व्यस्त रहते हैं। कई बार तो उन्होंने अभ्यास तक करना छोड़ दिया। बजरंग फोन पर दुनिया के बड़े पहलवानों के वीडियो देखते हैं और उनके हर पहलू पर पैनी नजर रखते हैं। इससे उन्हें अपनी तैयारी करने में मदद मिलती है।
हरियाणा के झज्जर के रहने वाले बजरंग को कुश्ती विरासत में मिली। उनके पिता बलवान पूनिया अपने समय के नामी पहलवान रहे, लेकिन गरीबी ने अपने करियर को आगे नहीं बढ़ने दिया। कुछ ऐसा ही बजरंग के साथ हुआ। बजरंग के पिता के पास भी अपने बेटे को घी खिलाने के पैसे नहीं होते थे। इसके लिए वह बस का किराया बचाकर साइकिल से चलने लगे। जो पैसे बचते, उसे वो अपने बेटे के खाने पर खर्च करते थे।
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