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अटलजी की अस्थियां हरकी पैड़ी में विसर्जित, लाखों लोगों ने दी आखिरी विदाई

हरिद्वार। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न पुरस्कार विजेता अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां रविवार को हरिद्वार के हरकी पैड़ी में करीब सवा एक बजे विसर्जित कर दी गईं।
अटलजी की अस्थियों को वाहन में रखकर कलश यात्रा अंतिम पड़ाव पर हजारों लोगों की भीड़ के साथ पहुंची थी।मायापुर से होते हुए हरकी पैड़ी की तरफ बढ़ रही अस्थि कलश यात्रा में रास्ते भर में दोनों तरफ लोगों का हुजूम उमड़ा था।
लोग पुष्प वर्षा करते गए अटल जी को दे रहे श्रद्धांजलि। एक वाहन में देशभक्ति गीत की धुन चलाई जा रही थी। हर की पौड़ी पर अपने नेता के अंतिम दर्शन करने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जमा थी।
इस दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई वरिष्ठ नेता वाहन में सवार थे।
सुबह करीब 10:40 बजे वायु सेना के विशेष विमान से भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की बेटी नमिता भट्टाचार्य अटल जी की अस्थियों को लेकर जॉली ग्रांट हवाई अड्डा पर उतरे। विशेष विमान में 7 लोग थे सवार।
पूर्व प्रधानमंत्री के दामाद रंजन भट्टाचार्य के हाथों में अस्थि में कलश था। उनकी पत्नी नमिता भट्टाचार्य, बेटी निहारिका समेत परिवार की दो अन्य महिलाएं भी कलश यात्रा में शामिल थी।
जॉलीग्रांट से दो अलग-अलग हेलीकॉप्टर से परिजन और भाजपा नेता हरिद्वार के लिए रवाना हुए। यहां पन्‍ना लाल भल्‍ला नगरपालिका इंटर कॉलेज से अस्‍थी कलश यात्रा शुरू हुई थी।
बताते चलें कि योगी सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियों को यूपी की कई नदियों में प्रवाहित करने का फैसला किया है। अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग नदियों के नाम तय किए गए हैं। सभी नदियों में अटल जी की अस्थियां विसर्जित के पीछे मकसद है कि ये नदियां जहां से भी होकर गुजरेगी, वहां के लोग अटल जी के साथ एक जुड़ाव महसूस करेंगे।
बताते चलें कि शुक्रवार शाम दिल्ली के राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी दत्तक बेटी नमिता ने कांपते हाथों से वाजपेयी की चिता को मुखाग्नि दी थी।
अटल के अस्थि प्रवाह एवं अन्य कर्मकांड उनके तीर्थ पुरोहित पंडित अखिलेश शास्त्री द्वारा ही कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि शनिवार दोपहर उनके पास अटलजी के भांजे अनूप मिश्रा का फोन आया था। अनूप ने ही उन्हें अस्थि विसर्जन कराने की जिम्मेदारी दी थी।
पहले अस्थि विसर्जन के कार्यक्रम को पैदल हरिद्वार की सड़कों से ले जाने की तैयारी थी, लेकिन समय की पाबंदी को देखते हुए कारों के काफिले में अटल बिहारी की अस्थियों को ले जाया गया। इस दौरान उनके चाहने वाले लोग सड़कों पर पुष्पवर्षा की।
अटल की याद में सोमवार को दिल्ली के डी जाधव स्टेडियम में सर्वदलीय प्रार्थना सभा होगी। साथ ही, सभी राज्यों की राजधानियों में प्रार्थना सभाएं आयोजित होंगी।
इससे पहले अस्थि कलश शांतिकुंज में संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी शर्मा के समाधि स्थल के पास रखा जाएगा। बता दें कि लंबी बीमारी के बाद पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का निधन 16 अगस्त को हो गया था।
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