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पाक के आर्मी चीफ से गले मिलने पर घिरे सिद्धू, सीएम अमरिंदर सिंह ने कही ये बात

अमृतसर। पंजाब के कैबिनेट मंत्री और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने के बाद आज भारत लौट आए। वो अटारी वाघा सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए।
पाकिस्तान में सेना प्रमुख जनरल बाजवा से गले मिलने को लेकर घिरे सिद्धू ने उसकी सफाई में कहा कि," अगर कोई( जनरल बाजवा) मेरे पास आए और ये कहे कि हमारी साझी संस्कृति है और हम गुरु नानकदेव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर बॉर्डर श्रद्धालुओं के लिए खोलेंगे, तो कोई क्या करेगा।"
इतना ही नहीं इमरान खान के शपथग्रहण समारोह में पीओके के प्रेसिडेंट के मसूद खान के बगल में बैठने को लेकर सिद्धू की देश में काफी आलोचना हो रही है। भारत लौटने पर पंजबा के कैबिनेट मंत्री सिद्धू ने इस पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि, अगर आपको कोई मेहमान बनाकर बुलाए तो आप वहीं बैठते हैं, जहां आपको कहा जाता है। मैं कही और बैठा था, लेकिन मुझे वहां बैठने के लिए कहा गया।
बताते चलें कि पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान ने शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ के साथ ही वह पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बने गए। पंजाब सरकार में मंत्री और कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लेने पहुंचे थे।
इससे पहले सिद्धू ने पाक मीडिया से बातचीत में कहा था कि," मैं राजनेता नहीं, दोस्त बनकर यहां आया। मैं मोहब्बत का पैगाम लेकर हिंदुस्तान से यहां आया। जितनी मोहब्बत मैं लेकर आया था, उससे 100 गुना ज्यादा वापस लेकर जा रहा हूं। जो वापस आया वो सूद समेत है। मुझे जो एक दिन में मिला, वो पूरी जिंदगी नहीं मिलता। जनरल बाजवा ने मुझे गले लगाया और कहा कि हम शांति चाहते हैं। बाजवा ने मुझसे कहा कि हम गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के मौके पर करतारपुर गुरुद्वारे की तरफ जाने वाला रास्ता खोलने पर विचार कर रहे हैं। यह मेरा फर्ज है कि मैं देश वापस जाकर सरकार से एक कदम बढ़ाने को कहूं। अगर हम एक कदम आगे बढ़ाएंगे तो यहां के लोग दो कदम आगे बढ़ाएंगे।"
भाजपा ने खड़े किए सवाल
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिद्धू के इस दौरे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सिद्धू को पहले पीओके के कथित राष्ट्रपति मसूद खान से अलग बैठाया गया था। मगर, बाद में मसूद खान को आगे बैठाया गया। सिद्धू को इस पर आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
वे पाक के सेना प्रमुख जनरल बाजवा से गले लगे। सब को पता है कि बाजवा भारत में होने वाली जवानों की शहादत के लिए जिम्मेदार हैं। यहां आतंकी हमलों में नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं। क्या आप को ये याद नहीं आया? आपकी पार्टी को भारत के सेना प्रमुख पर विश्वास नहीं होता, लेकिन सिद्धू को बाजवा पर विश्वास हो जाता है। राहुल गांधी को इस पर जवाब देना चाहिए।
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