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मुन्ना बजरंगी हत्या मामले में जेल अधिकारियों को आरोपपत्र थमाने की तैयारी

लखनऊ। उप्र की बागपत जेल में गत नौ जुलाई की सुबह माफिया मुन्ना बजरंगी पर जिस पिस्टल से गोलियां दागी गई थीं, वह भीतर किसके जरिए पहुंची थी? मुन्ना हत्याकांड से जुड़ा यह सबसे बड़ा सवाल डीआइजी जेल, आगरा की जांच में भी पहेली ही बना रह गया।
डीआइजी जेल की जांच में निलंबित जेलर व डिप्टी जेलर सहित चार जेलकर्मियों के अलावा एक अन्य डिप्टी जेलर भी दोषी पाए गए हैं। अब पांचों आरोपित जेलकर्मियों को आरोपपत्र थमाने की तैयारी है। माना जा रहा है कि बुधवार को उन्हें आरोपपत्र जारी कर जवाब तलब किया जाएगा। दोषी जेल अधिकारियों की बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हो सकती है।
मुन्ना बजरंगी हत्याकांड के बाद शासन ने बागपत जिला कारागार के जेलर उदय प्रताप सिंह, डिप्टी जेलर शिवाजी यादव, हेड वार्डर अरजिंदर सिंह और वार्डर माधव कुमार को निलंबित कर दिया था। घटना की विभागीय जांच डीआइजी, आगरा को सौंपी गई थी। डीआइजी की जांच रिपोर्ट में डिप्टी जेलर एसपी सिंह भी दोषी पाए गए हैं।
जांच में सामने आया कि मुन्ना की हत्या के आरोपित कुख्यात सुनील राठी पर जेल अधिकारियों का कोई अंकुश नहीं था। जेल के भीतर चेकिंग में भी कई स्तर पर गंभीर चूक पाई गई। सूत्रों का कहना है कि जेलर उदय प्रताप की पूर्व में भी शिकायतें रही हैं। उन पर जेल में बंद डी-कंपनी के एक गुर्गे से अपने रिश्तेदार को ठेका दिलाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगा था। जांच के दौरान आरोपित जेल अधिकारी व कर्मी पिस्टल के सवाल पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे। कुछ बंदियों ने भी इन अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनियमितताओं की पोल खोली। जेल में कई मुलाकातियों की रजिस्टर पर इंट्री किए बिना सीधे मुलाकात कराए जाने की बात भी सामने आई है।
एडीजी जेल चंद्रप्रकाश का कहना है कि जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही पाई गई है। आरोपित जेल अधिकारियों व कर्मियों को आरोपपत्र दिए जाने की प्रकिया शुरू कर दी गई है।

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