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हालात इतने खराब नहीं कि 2 माह बाद बंद करना पड़े परिचालनः जेट एयरवेज

नई दिल्ली। जेट एयरवेज ने शुक्रवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनके मुताबिक कंपनी की माली हालत इतनी खराब हो गई है कि उड़ानों का संचालन 60 दिन से ज्यादा समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटाने की कोई योजना नहीं है, जैसा कि अटकलें लगाई जा रही हैं।
एक टीवी रिपोर्ट में जेट एयरवेज के हवाले से इतना जरूर कहा गया कि कंपनी ने मौजूदा चुनौतियों से निपटने का रास्ता निकालने को लेकर सभी हितकारकों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ बातचीत की है।
इससे पहले ऐसी कुछ रिपोर्ट्स आईं थी कि जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल और उनका परिवार समेत कंपनी के प्रमोटर 51 फीसदी हिस्सेदारी में से 20 फीसदी बेचने की योजना बना रहे हैं क्योंकि कंपनी के पास इतने संसाधन नहीं बचे हैं कि उड़ानों का परिचालन दो महीनों से ज्यादा समय तक जारी रखा जा सके।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेट एयरवेज बड़े पैमाने पर लागत कटौती की तैयारी में है। मैनेजमेंट की टीम ने मुंबई और दिल्ली में बैठक करके कर्मचारियों को बताया है कि कंपनी की हालत बहुत खराब है, लिहाजा लागत घटाने के कदम उठाने होंगे। हाल ही में जेट एयरवेज ने अपने कर्मचारियों से कहा था कि उन्हें 25 फीसदी कम वेतन पर काम करना पड़ेगा। कर्मचारियों ने इसका विरोध भी किया है। रिपोर्ट में जेट के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से ये जानकारियां दी गईं थी।
कर्मचारियों का भरोसा उठा
जेट के मैनेजमेंट ने कथित तौर पर कर्मचारियों से कहा है कि उड़ने जारी रखने के लिए लागत घटानी होगी। इस पर कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने उन्हें यह सब पहले नहीं बताया इस कारण मैनेजमेंट पर उनका भरोसा उठ गया है। जेट के कुछ कर्मचारियों के मुताबिक लागत घटाने के लिए स्थिति को बढ़ाचढ़ा कर पेश किया जा रहा है।
क्या कहती है रिपोर्ट
- जेट ने कई कर्मचारियों को निकाला है।
- इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा गया है।
- कर्मचारियों को 2 साल तक 25 फीसदी कम वेतन लेने के लिए कहा गया है।
 कर्मचारियों के लिए 60 दिन का नोटिस पीरियड खत्म कर दिया गया है।
- फर्स्ट ऑफिसर्स के लिए 7 साल के बॉन्ड या 1 करोड़ की शर्त हटा ली गई है।
कमजोर माली हालत के कारण
- ईंधन की लगातार बढ़ती कीमत
- बाजार हिस्सेदारी पर इंडिगो का कब्जा
- वित्त वर्ष 2017-18 में 767 करोड़ का घाटा
- वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में 1 हजार करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान
चिंता की जरूरत नहीं
जेट एयरवेज से टिकट बुक करने वालों को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। कंपनी बैंकों से लोन लेकर उड़ान संचालन जारी रख सकती है। जानकारों के मुताबिक इतनी बड़ी एयरलाइंस अचानक बंद नहीं होगी।
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