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भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक RS में भी पास, जब्त होगी भगोड़े अपराधियों की संपत्ति

नई दिल्ली। कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए देश छोड़कर भागने वाले अपराधियों पर नकेल कसने की दिशा में सरकार को बड़ी सफलता मिली है। इस संबंध में भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018 बुधवार को राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया। लोकसभा से यह विधेयक 19 जुलाई को पारित हो गया था। 100 करोड़ रुपये से अधिक के आर्थिक अपराध के मामलों को इस कानून के दायरे में रखा गया है। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे भगोड़े आर्थिक अपराधियों के खिलाफ यह कानून मददगार होगा।
विधेयक पर चर्चा के दौरान कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कानूनी कार्यवाही से बचने के लिए देश छोड़कर भागने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन्हें रोकने की जरूरत है। वर्तमान आपराधिक कानून इसमें पूरी तरह से सक्षम नहीं हैं। वर्तमान कानून हमें उनकी संपत्ति जब्त करने की अनुमति नहीं देता।
नया कानून ऐसे लोगों को रोकने के लिए प्रभावी, तेज और वैधानिक तरीका है। इसके तहत अदालत के समक्ष समर्पण नहीं करने वालों की संपत्ति जब्त की जा सकेगी। सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि जब्त की गई संपत्ति के साथ क्या किया जाए। राज्यसभा में विधेयक पेश किए जाते समय सभापति वेंकैया नायडू ने कहा, "देश का आम नागरिक यह सोचकर परेशान है कि क्या इन आर्थिक अपराधियों से निपटने में देश का कानून असहाय है।"
बड़े अपराधियों पर नजर
नए कानून में 100 करोड़ रुपये की सीमा पर वित्त मंत्री गोयल ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बड़े अपराधियों को पकड़ना है, केवल अदालतों में मामले बढ़ाने का नहीं। यह कानून ऐसे अपराधियों को देश छोड़ने से रोकेगा। जो लोग भाग चुके हैं, वे भी संपत्ति जब्त होने के डर से वापस आएंगे।
तय समयसीमा में होगी कार्रवाई
इस कानून के तहत प्रवर्तन निदेशालय जांच एजेंसी की भूमिका निभाएगा। कानून के तहत किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए विशेष अदालत का प्रावधान है। किसी व्यक्ति के अपराधी घोषित होते ही उसकी संपत्ति जब्त कर बेचने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह सब कुछ तय समयसीमा के भीतर होगा। गोयल ने बताया कि सरकार देश छोड़कर भाग चुके अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए भी प्रयास कर रही है।
विपक्ष ने साधा निशाना
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक के. तनखा ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि देश में कानूनों की कमी नहीं है। इसके बावजूद अपराधी भाग जाते हैं, क्योंकि उनको रोकने की सरकार के पास इच्छाशक्ति नहीं है। राज्यसभा में बहस के दौरान कुछ सदस्यों ने विधेयक की प्रति नहीं मिलने का आरोप भी लगाया। नायडू ने इसकी जांच का आदेश दे दिया।
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