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दिल्ली का कनॉट प्लेस दुनिया की नौवीं सबसे महंगी ऑफिस लोकेशन

नई दिल्ली। ऑफिस लोकेशन के किराए के मामले में देश की राजधानी के दिल में बसे कनॉट प्लेस का रुतबा साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। अमेरिका की प्रॉपर्टी सलाहकार कंपनी सीबीआरई के नवीनतम सालाना सर्वे में सबसे महंगी ऑफिस लोकेशन के मामले में कनॉट प्लेस एक पायदान ऊपर चढ़कर दुनियाभर में नौवें स्थान पर पहुंच गया है।
सीबीआरई के मुताबिक कनॉट प्लेस में ऑफिस के लिए सालाना किराया 153 डॉलर (10,250 रुपए) प्रति वर्गफुट पर जा पहुंचा है। पिछले साल इस सूची में कनॉट प्लेस 10वें स्थान पर था।दिलचस्प यह है कि सीबीआरई के सालाना "ग्लोबल प्राइम ऑफिस ऑक्यूपेंसी कॉस्ट्स" सर्वे के मुताबिक मुंबई के नरीमन प्वाइंट "सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट" (सीबीडी) के अलावा बांद्रा कुर्ला कांप्लैक्स (बीकेसी) की रैंकिंग फिसली है और दोनों का किराया घटा है।
सीबीआरई की सूची में सालाना 306.57 डॉलर प्रति वर्गफुट किराए के साथ हांगकांग (सेंट्रल) पहले स्थान पर है। वहीं, ब्रिटेन का लंदन (वेस्ट एंड) दूसरे, चीन का बीजिंग (फाइनेंस स्ट्रीट) तीसरे, हांगकांग में ही कोलून चौथे और बीजिंग (सीबीडी) पांचवें स्थान पर है। अमेरिका के न्यूयॉर्क (मिडटाउन-मैनहट्टन) को सूची में महंगी ऑफिस लोकेशन के हिसाब से छठा और मिडटाउन-साउथ मैनहट्टन को सातवां स्थान मिला है।
सीबीआरई की सूची में जापान के टोक्यो (मरुनौची/ओटेमाची) को आठवां और लंदन (सिटी) को 10वां स्थान मिला है। वहीं, सूची में 96.51 डॉलर प्रति वर्गफुट सालाना की दर के साथ बीकेसी 26वें स्थान पर चला गया है, जो पिछले वर्ष 16वें स्थान पर था। नरीमन प्वाइंट (सीबीडी) पिछले वर्ष के 30वें स्थान से फिसलकर इस वर्ष 37वें स्थान पर चला गया है। वहां प्रति वर्गफुट सालाना किराया 72.80 डॉलर के स्तर पर है।
सीबीआरई के मुताबिक महंगी लोकेशन के पैमानों में किराया, स्थानीय टैक्स और सर्विस चार्ज को शामिल किया गया है। संस्था के भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया चेयरमैन अंशुमन मैगजीन ने कहा- "बेहद प्रमुख बाजार होने के चलते कनॉट प्लेस में कारोबारी गतिविधियों में तेजी आई है और यह एक पायदान चढ़कर सबसे महंगी ऑफिस लोकेशन के मामले में दुनिया में नौवें स्थान पर आ गया है।"
उन्होंने आने वाले दिनों में मुंबई में ऑफिस लोकेशन के किराए में फिर से मजबूती आने की भी उम्मीद जताई। भारतीय रियल एस्टेट बाजार के बारे में मैगजीन ने कहा कि फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनियों की तरफ से बढ़ रही मांग के चलते प्राइम ऑक्यूपेंसी कॉस्ट में तेजी आई है।
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